मेरठ, जेएनएन। सशस्त्र सेना में हथियार और उपकरण एक देश की सेना के ही पराक्रम नहीं होते, बल्कि देशवासियों का भी गौरव होते हैं। मजबूत व उत्तम हथियार रक्षकों पर देशवासियों का आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। देश की युवा पीढ़ी में वही आत्मविश्वास बनाए रखने और 72वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को सेना ने मिलिट्री बैंड प्रस्तुति व सैन्य उपकरणों की प्रदर्शनी लगाई। चार्जिग रैम डिवीजन की ओर से भगत लाइंस में आयोजित प्रदर्शनी में शहर के विभिन्न स्कूलों व कालेजों के एनसीसी कैडेट व अन्य छात्राओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनी का शुभारंभ चर्जिग रैम डिवीजन के जनरल आफिसर कमांडिग मेजर जनरल एसके शर्मा ने किया। इस अवसर पर कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल व एडीएम सिटी अजय तिवारी सहित पुलिस अधिकारी भी उपस्थित रहे।

बैंड से निकली विजय भारत की धुन

सेना की पंजाब रेजिमेंट की 17वीं बटालियन के पाइप बैंड की प्रस्तुति ने सर्द मौसम में देशभक्ति की गर्मी पैदा कर दी। भारतीय सेना में पिछले साल बेहतरीन आर्मी बैंड के पुरस्कार से सम्मानित इस बैंड ने 10 तरह की धुनों से देशभक्ति जज्बा जगाया। इसकी शुरुआत विजय भारत की धुन से हुई। इसके बाद मिलीजुली, देशों का सरताज भारत, माई होम, हंडर पाइपर, थेरेपे लंदन बोनी, रील, गोरखा ब्रिगेड, ड्रम्स काल और अंत में सारे जहां से अच्छा की धुन बजाई।

उपकरणों के लिए दिखी जिज्ञासा

तीन बैच में करीब 12 सौ कैडेट्स व छात्र शामिल रहे। हर बैच के लिए बैंड प्रस्तुति हुई और उसके बाद प्रदर्शनी दिखाई गई। प्रदर्शनी में युवाओं ने युद्ध के समय का सर्विलांस रडार, थर्मल इमेजर, रात में दुश्मन पर नजर रखने वाले पैसिव नाइट साइट, फ्लेम लांचर, इंसास राइफल, 81 एमएम मोर्टार, इंसास एलएमजी, मशीन गन, मशीन पिस्टल, राइफल, मल्टीशाट ग्रेनेड लांचर आदि के बारे में जानकारी प्राप्त की।

फौजी बनकर संजो लिया लम्हा

कैडेट्स के लिए सेना ने सेल्फी प्वाइंट भी बनाया था। जंग के लिए तैयार सैनिकों के कटआउट के साथ कैडेट्स ने खूब सेल्फी ली। सैन्य अधिकारियों के साथ भी तस्वीरें लीं। कैडेट्स ने अफसरों से सेना में जाने के अवसरों और इसके लिए जरूरी तैयारियों की जानकारी भी ली। सेना आपका स्वागत करती है : मेजर जनरल

चार्जिग रैम डिवीजन के जनरल आफिसर कमांडिग मेजर जनरल एसके शर्मा ने महिला कैडेट्स को संबोधित करते हुए कोरोना काल के बाद देश और दुनिया की महिलाओं को पुरुषों के समान सशक्त बनकर उभरना है। यही इस साल नारी सशक्तीकरण दिवस (8 मार्च) की थीम है। स्वयं को कमतर न आंके क्योंकि आप सभी पुरुषों की तुलना में समान ताकत रखती हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने बालिकाओं को हर क्षेत्र में प्रवेश करने का अवसर देना शुरू कर दिया है। हमारे देश में तीन क्षेत्रों को काफी सम्मान व गर्व से देखा जाता है। एक है सेना, दूसरा पुलिस और तीसरा पायलट। भारतीय सेना इन तीनों क्षेत्रों में महिलाओं को अवसर दे रही है। कड़ी मेहनत करें और सेना में भर्ती होने की राह दिखाने में जो भी मदद चाहिए उसके लिए हम मौजूद हैं।

इन्होंने कहा-

मैं फौज का हिस्सा बनना चाहती हूं। बालिकाएं किसी से कम नहीं हैं। हमने यह साबित भी किया है। जो भी जिम्मेदारी मिलेगी हम उसे पूरी तरह से निभाने में सक्षम हैं।

-कैडेट जाह्नवी आफिसर्स ड्यूटी के साथ सरहद की ड्यूटी के लिए भी बालिकाएं पूरी तरह से तैयार हैं। एनसीसी में हमें एक सैनिक की ही तरह प्रशिक्षण मिलता है। पूर्व में भी जरूरत पड़ने पर आजादी के बाद दो साल एनसीसी ने सरहदों पर ड्यूटी की थी।

-कैडेट मानसी मेरे पिता सेना से जुड़े हैं। इसीलिए मैंने भी एनसीसी को चुना जिससे आगे चलकर मैं सेना में शामिल हो सकूं। हमारा प्रशिक्षण सेना के अधिकारी ही करते हैं और सेना भर्ती में एनसीसी का लाभ भी मिलता है।

-कैडेट छवि बालियान मैं सेना में जाने की कोशिश कर रहा हूं। कुछ भर्ती रैलियों में भी शामिल हुआ हूं। शुरुआत में हाथ में टैटू के कारण मेडिकल में अनफिट हो गया था। अब उसे हटाकर फिर कोशिश कर रहा हूं। एएससी की रैली में हिस्सा लेने की तैयारी कर रहा हूं।

-कैडेट विवेक चौधरी

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