जागरण संवाददाता, मेरठ। सर्वार्थ सिद्धि योग और पुण्यकाल में 6 अगस्त को शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। भगवान शंकर की पूजा-उपासना और आराधना का विशेष पर्व है शिवरात्रि, जिसे श्रवण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। शिवरात्रि में रात्रि का विशेष महत्व है। ज्योतिषीय तिथि गणना के अनुसार चतुर्दशी तिथि जिस दिन रात्रि तक व्याप्त हो उस दिन को ही शिवरात्रि का पर्व निश्चित किया जाता है। जब त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथि की संधि होती है, उस समय शिवरात्रि का वास्तविक पुण्यकाल और भगवान शिव के अभिषेक का विशेष समय शुरू होता है।

सूरजकुंड स्थित बाबा मनोहर नाथ मंदिर की महामंडलेश्वर नीलिमानंद महाराज का कहना है कि 6 अगस्त, शुक्रवार की शाम को चतुर्दशी तिथि शुरू हो जाएगी और पूरी रात व्याप्त रहेगी। इसलिए 6 अगस्त को ही शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। शाम 6:28 पर त्रयोदशी और चतुर्दशी का मेल होगा। इसे शिवरात्रि का विशेष पुण्यकाल माना गया है।

यह होगा भगवान शिव के अभिषेक का शुभ मुहूर्त : ज्योतिषाचार्य विभोर इंदुसुत का कहना है कि माना जाता है कि श्रवण मास में ही महादेव ने सृष्टि की रक्षा के लिए समुद्रमंथन से निकले विष को अपने कंठ में ग्रहण किया था। तब महादेव के कंठ में उत्पन्न विष की ऊष्मा को कम करने के लिए सभी देवताओं ने जल से भगवान शिव का अभिषेक किया था। तभी से श्रवण मास में जलाभिषेक की परंपरा शुरू हुई। इस बार शिवरात्रि पर पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बना रहेगा, और भक्त दिन में भी अपने आराध्य का जलाभिषेक कर सकेंगे। शाम 6:28 पर त्रयोदशी और चतुर्दशी का मेल होगा और यही भगवान शिव के अभिषेक का विशेष पुण्यकाल होगा। इसलिए जो भक्त प्रतिवर्ष कांवड़ लाते हैं, वह सभी शाम 6:28 के बाद भगवान शिव का अभिषेक अवश्य कर सकते हैं।

इन वस्तुओं से करें शिवलिंग का अभिषेक

स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए पंचामृत दूध, दही, बूरा, शहद और मक्खन से अभिषेक करें।

धन प्राप्ति के लिए गन्ने के रस से अभिषेक करें।

शत्रु बाधा मुक्ति के लिए सरसों के तेल से अभिषेक करें।

मानसिक एकाग्रता के लिए दूध से अभिषेक करें।

वर प्राप्ति के लिए केसर युक्त जल से अभिषेक करें।

सर्वसिद्धि के लिए गंगाजल से अभिषेक करें।

कालसर्प योग की शांति के लिए काले तिल और चंदन युक्त जल से अभिषेक करें।

साढ़ेसाती के लिए काले तिल युक्त जल से अभिषेक करें।

 

Edited By: Himanshu Dwivedi