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नीले ड्रम वाली मुस्कान और साहिल को फांसी कब होगी? तीन पड़ावों से गुजने के बाद ही तय होगी तारीख

Published: Fri, 16 Oct 2026 01:16 PM (GMT+05:30)

सौरभ राजपूत हत्याकांड में साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को मिली मृत्युदंड की सजा के बाद अब कानूनी प्रक्रिया के कई अहम पड़ाव बाकी हैं।

सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी साहिल और मुस्कान।

सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी साहिल और मुस्कान।

HighLights

  1. मृत्युदंड के लिए हाईकोर्ट की पुष्टि आवश्यक है।

  2. दोषी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

  3. राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका का विकल्प।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी को मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद अब सजा के अमल की कानूनी प्रक्रिया अहम होगी।

सत्र न्यायालय से मिली फांसी की सजा पर हाई कोर्ट की पुष्टि आवश्यक है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के स्तर तक पहुंच सकता है। वहीं, दोषियों के पास राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल करने का विकल्प भी रहेगा।

हाई कोर्ट की मुहर के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

शासकीय अधिवक्ता केके चौबे ने बताया कि निचली अदालत से मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद दंड प्रक्रिया के तहत हाई कोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है। हाई कोर्ट सजा और मामले के साक्ष्यों की न्यायिक समीक्षा करता है। इसके बाद दोषी सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट यदि मृत्युदंड को बरकरार रखता है तो सजा के खिलाफ उपलब्ध अन्य कानूनी विकल्पों का रास्ता भी अपनाया जा सकता है। वहीं, अदालत मृत्युदंड को बदलकर आजीवन कारावास या कानून के अनुरूप दूसरी सजा भी दे सकती है।

राष्ट्रपति के पास पहुंचेगी दया याचिका

न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध विकल्पों के बाद साहिल और मुस्कान राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका दाखिल कर सकते हैं। संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को मृत्युदंड के मामलों में क्षमादान, सजा के निलंबन, परिहार या लघुकरण की संवैधानिक शक्ति प्राप्त है। दया याचिका पर निर्णय निर्धारित संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया जाता है।

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कई कानूनी पड़ावों से गुजरना होगा फैसला

मृत्युदंड के मामले में हाई कोर्ट की पुष्टि, सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध न्यायिक उपाय और दया याचिका की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है। यदि मृत्युदंड की पुष्टि हो जाती है और दोषियों को किसी भी स्तर पर राहत नहीं मिलती, तभी सजा पर अमल की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, यह अपीलों, याचिकाओं और न्यायिक कार्यवाही की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

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