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नीले ड्रम से हथियारों तक… कोर्ट में ऐसे खुले सौरभ हत्याकांड के सबूत, गद्दे के टुकड़े और खून से सनी चादरों ने खोले राज

Published: Fri, 16 Oct 2026 06:51 AM (IST)

सौरभ हत्याकांड में मेरठ की अदालत में नीले ड्रम, हथियार, खून से सनी चादर और गद्दे के टुकड़े जैसे अहम ...और पढ़ें

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HighLights

  1. नीले ड्रम, हथियार, खून से सनी चादरें कोर्ट में पेश।

  2. बचाव पक्ष ने फोरेंसिक जांच और गवाहों पर सवाल उठाए।

  3. विवेचना में वीडियोग्राफी और साक्ष्य जुटाने में कमी।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सौरभ हत्याकांड में अदालत के सामने नीला ड्रम, हत्या में शामिल हथियार, खून से सनी चादर और गद्दे के टुकड़े को बतौर साक्ष्य पेश किया था। ई-साक्ष्य एप से की गई वीडियोग्राफी और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों का ब्योरा दिया। वहीं, बचाव पक्ष ने केस डायरी, ड्रम पर लगी पर्चियां और स्वतंत्र गवाह की अनुपस्थिति पर अदालत का ध्यान खींचा।

नीले ड्रम को काटकर शव निकालने की कार्रवाई की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी फील्ड यूनिट ने की थी। ड्रम को घटनास्थल पर काटने की व्यवस्था नहीं होने के कारण मोर्चरी ले जाया गया था। वहां ड्रम काटकर शव निकाला गया और पंचायतनामा की कार्रवाई की गई।

इंस्पेक्टर रमाकांत पचौरी ने अदालत में बताया कि 18 मार्च 2025 को साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की निशानदेही पर सौरभ का शव बरामद किया था। शव को नीले प्लास्टिक के ड्रम में सीमेंट और रेत से जमाया था। अदालत में ड्रम के कटे हुए हिस्से और ढक्कन को भी प्रस्तुत किया। घटनास्थल से बरामद खून से सनी चादर, गद्दे का टुकड़ा, खाली दवा की शीशी और अन्य वस्तुओं को भी अदालत में पेश किया।

हस्ताक्षर नहीं होने की कही बात 

हत्या में इस्तेमाल किया उस्तरा और मछली काटने वाला बड़ा स्टील का चाकू भी अदालत में प्रस्तुत किया। मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता रेखा जैन ने नीले ड्रम की फोरेंसिक जांच नहीं कराने और ड्रम के ढक्कन और नीचे से कटे हिस्से पर पर मुकदमे से संबंधित पर्ची लगाकर हस्ताक्षर नहीं होने की बात कही।

विवेचक रमाकांत पचौरी ने बताया कि संबंधित वस्तुओं को पहले पिन्नी और फिर कपड़े में रखकर सील किया गया था। बाहरी पुलिंदों पर मुकदमे का विवरण और संबंधित लोगों के हस्ताक्षर अंकित थे। अधिवक्ता रेखा जैन ने कहा कि मुस्कान के किराये के मकान के आसपास घनी आबादी होने के बावजूद मकान मालिक या अन्य किरायेदारों को गवाह के रूप में शामिल नहीं किया गया।

गिरफ्तारी के स्थान का नक्शा-नजरी नहीं बनाए जाने और गिरफ्तारी मेमो पर स्वतंत्र गवाहों के हस्ताक्षर नहीं होने की बात भी उठाई। विवेचक ने बताया कि विवेचना में वीडियोग्राफी ई-साक्ष्य एप से कार्रवाई की गई थी और इसका विवरण केस डायरी में दर्ज था। विवेचक ने स्वीकार किया कि सौरभ की मां रेनू की काल डिटेल नहीं निकलवाई गई।

सौरभ और साहिल-मुस्कान किस विद्यालय में पढ़ाई की थी, यह जानकारी भी सामने नहीं ला सकें। उन्होंने स्वीकार किया कि आरोपितों की गिरफ्तारी, पोस्टमार्टम और पंचायतनामा की कार्रवाई की वीडियोग्राफी नहीं कराई गई थी। सौरभ के फोन की वायस रिकार्डिंग नहीं लेने और अंगुली चिह्न विशेषज्ञ को नहीं बुलाने से संबंधित तथ्य भी सामने आए।

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अधिवक्ता रेखा जैन ने बताया कि घटना स्थल से फिंगरप्रिंट के निशान नहीं लेना, डीएनए परीक्षण नहीं कराना, बिसरा सुरक्षित नहीं रखना, आरोपितों के मोबाइल फोन से संबंधित अतिरिक्त साक्ष्य नहीं जुटाना और हिमाचल प्रदेश में उनके घूमने के दौरान भुगतान से जुड़े साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करना बताया। गिरफ्तारी की सूचना साहिल के परिवार को नहीं देने अौर दोनों मुजरिमो के एक विद्यालय में पढ़ने के साक्ष्य नहीं उठाने की बात कही गई।