विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

सौरभ हत्याकांड : फांसी के फैसले को दी चुनौती, साहिल-मुस्कान ने गिनाईं 15 कानूनी खामियां

By Sushil Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sun, 01 Nov 2026 05:30 AM (IST)

सौरभ राजपूत हत्याकांड में मौत की सजा पाए साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती ...और पढ़ें

साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी। फाइल फोटो

साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी। फाइल फोटो

HighLights

  1. हाई कोर्ट में अपील दाखिल कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बताया मनमाना और गैरकानूनी

  2. डीएनए जांच से लेकर इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों की प्रमाणिकता और शव की पहचान पर सवाल

जागरण संवाददाता, मेरठ। चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में मृत्युदंड की सजा पाए साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी ने हाई कोर्ट में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। दोनों की ओर से दाखिल अपील में फैसले को गैरकानूनी और मनमाना बताते हुए 15 बिंदुओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

अपील में न केवल अभियोजन की पूरी कहानी और जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए गए हैं, बल्कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता, इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों की वैधानिकता और फोरेंसिक जांच में कमियों को भी दोषसिद्धि के खिलाफ आधार बनाया गया है। हाई कोर्ट के अधिवक्ता सुशील शुक्ला ने बताया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा।

ट्रायल कोर्ट ने पर्याप्त और ठोस साक्ष्यों के बजाय अनुमानों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर दोषी ठहरा दिया। अपील में सुप्रीम कोर्ट के चर्चित फैसले शरद बिरधीचंद सारदा बनाम महाराष्ट्र राज्य का हवाला देते हुए कहा गया है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी इतनी मजबूत होनी चाहिए कि आरोपित की बेगुनाही की कोई दूसरी संभावना न बचे।

साहिल और मुस्कान ने हथियार, सीमेंट और ड्रम की खरीद के दावों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका तर्क है कि इनकी खरीद की स्वतंत्र पुष्टि के लिए न तो सीसीटीवी फुटेज और न ही बिल पेश किए गए। एफआइआर में समय और तारीख की विसंगतियों, बरामदगी मेमो पर स्वतंत्र सरकारी गवाहों के हस्ताक्षर और जांच के दौरान वीडियोग्राफी से जुड़े नियमों के पालन पर भी आपत्ति जताई गई है।

इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों को लेकर अपील में विशेष रूप से सवाल उठाए गए हैं। अभियोजन ने सीडीआर, टावर लोकेशन और ई-साक्ष्य एप पर अपलोड वीडियो रिकार्डिंग पर भरोसा किया। अधिवक्ता के मुताबिक, भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63(4)(सी) के तहत जरूरी प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किए गए। इसी तरह हथियारों, चादरों और हड्डियों व टिश्यू के नमूनों की डीएनए प्रोफाइलिंग और ब्लड ग्रुप मिलान नहीं कराया गया। यानि नीले ड्रम से मिले शव का डीएनए तक नहीं कराया गया। पोस्टमार्टम के दौरान बिसरा भी सुरक्षित नहीं रखा गया।

मृत्युदंड पर भी उठाए सवाल
अपील में दोषसिद्धि के साथ मृत्युदंड को भी चुनौती दी गई है। साहिल और मुस्कान की ओर से कहा गया है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित 'रेयरेस्ट आफ रेयर' सिद्धांत के दायरे में नहीं आता। ट्रायल कोर्ट ने सजा सुनाते समय अपराध की गंभीर परिस्थितियों पर तो ध्यान दिया, लेकिन अपीलकर्ताओं की उम्र, पूर्व आपराधिक इतिहास न होने, जेल में आचरण और बच्चों के आश्रित होने जैसे परिस्थितियों को नजरअंदाज कर दिया।

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।