मेरठ, [संतोष शुक्ल]। एनसीआर में वायु प्रदूषण पर केंद्र सरकार अलर्ट मोड में आ गई है। सेंट्रल मिनिस्ट्री आफ अर्थ साइंसेज की निगरानी में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रापिकल मीटियोरोलॉजी पुणो ने ऐसा यंत्र विकसित किया है, जिसके जरिए किस क्षेत्र में कितनी मात्र में पराली या कचरा जलेगा, इसका 72 घंटे पहले पता चल जाएगा। सेटेलाइट के जरिए एनसीआर के साहिबाबाद, गाजियाबाद, मेरठ, सोनीपत, फरीदाबाद से लेकर पंजाब के कई जिलों तक वायु प्रदूषण पर नजर रखी जाएगी, जहां से प्रदूषित हवा दिल्ली में दाखिल होती है।

सेटेलाइट की नजर में प्रदूषण

केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रलय ने एडवांस एयर क्वालिटी अर्ली वार्निग सिस्टम तैयार किया है। इसके अंतर्गत 15 साल के दौरान एनसीआर में पराली एवं कचरा जलाने की घटनाओं का डेटाबेस खंगाला गया। इसके लिए किस साल, किन क्षेत्रों में कितनी मात्र में कचरा जलाया गया, इसकी सटीक जानकारी हासिल की गई। उन क्षेत्रों पर सेटेलाइट से विशेष नजर रखी जाएगी, जहां पराली जलाने की आशंका 60 प्रतिशत से ज्यादा मिली है। माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों में फिर से पराली या प्लास्टिकयुक्त कचरा का दहन हो सकता है। तीन दिनों तक नजर रखी जाएगी।

पीएम-2.5 व मोनोआक्साइड पर खास फोकस

डिवायस के जरिए पीएम-2.5 एवं कार्बन मोनोआक्साइड की मात्र पर ज्यादा फोकस रखा जाएगा। वैज्ञानिकों के अनुसार एनसीआर के आसपास जलने वाली पराली हवा के साथ बहकर दिल्ली के स्मॉग में फंस जाती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सेटेलाइट मानीटरिंग की रिपोर्ट पर आधारित एक मैप जारी करेगा, जिससे हवा की दिशा और प्रदूषण की स्थिति का पता चलेगा।

क्यों रिस्क जोन में है मेरठ

मेरठ में पीएम-2.5 की मात्र सर्दियों में 500-600 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच जाती है। कचरा दहन व सड़क की धूल को बड़ा कारण माना गया है।

बिजली कट से बड़ी मात्र में जनरेटर चलाने से वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ता है। खासकर सल्फर, नाइट्रोजन व मोनोआक्साइड खतरनाक हैं।

कंस्ट्रक्शन कारोबार, उखड़ी सड़कें, धूल व उद्योगों में कागज जलाने से हवा प्रदूषित होती है।

इन्‍होंने बताया

इन्वायरमेंट पोल्यूशन कंट्रोल एथॉरटी ने हाल में नई दिल्ली व आसपास के दर्जनभर जिलों में वायु प्रदूषण की समीक्षा करते हुए जनरेटरों को प्रदूषण का बड़ा कारक बताया है। केंद्रीय मंत्रलय एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सिस्टम 72 घंटे पहले प्रदूषण की स्थिति पता कर लेगा। इससे विभागों को सक्रिय होकर प्रदूषण रोकने में मदद मिलेगी।

- पोलाश मुखर्जी, नेशनल र्सिोसेज डिफेंस काउंसिल

प्रदूषित एवं सूक्ष्म कणों की वजह से हर चौथे व्यक्ति पर सांस की बीमारी का रिस्क है। पीएम-2.5 और पीएम-10 की ज्यादा मात्र अस्थमा, ब्लडप्रेशर व हार्ट की बीमारी का भी कारक बन सकती है। प्रदूषण से भी सर्द मौसम में सांस की बीमारियां बढ़ जाती हैं।

- डा. तुषार त्यागी, सांस एवं छाती रोग विशेषज्ञ 

Posted By: Taruna Tayal

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस