बागपत, जागरण संवाददाता। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने गेहूं निर्यात पर सरकार द्वारा रोक लगाने के निर्णय की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इस बार ज्यादा रुपये किसान को मिल सकते थे, लेकिन सरकार ने गेहूं का निर्यात ही रोक दिया। यह पहला मौका था जब देश में पर्याप्त खाद्यान्न का भंडारण है, जिसमें मोटा अनाज शामिल है। गेहूं के सही रेट मिल रहे थे तो भेज देना चाहिए था ताकि किसान उत्साह के साथ और ज्यादा अन्न का उत्पादन करता।

मंगलवार को यहां पहुंचे राकेश टिकैत ने पत्रकार वार्ता के दौरान भाकियू के दो फाड़ होने पर कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पहले एक थे और अब विचार भिन्न हो गए, इसलिए उन्हें संगठन से निकाला गया है। वो भी किसानों के लिए काम करें। देश में 550 किसान संगठन हैं, सबको काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर-मस्जिद गांव-गांव में हैं। सरकार को इस विवाद को छोड़कर जनसंख्या नियंत्रण कानून पर काम करना चाहिए, लेकिन इस पर सरकार काम नहीं करेगी।

नलकूपों पर मीटर लगाने के मामले में राकेश टिकैत ने कहा कि भाकियू इसका कड़ा विरोध करेगी। हरियाणा सरकार किसानों को फ्री में बिजली दे रही है, जबकि हरियाणा में भी भाजपा की ही सरकार है। बागपत के किसान प्रदेश में सबसे महंगी बिजली ले रहे हैं। वे बोले, बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार को चाहिए कि सब्सिडी देकर किसानों को राहत देने का काम करे। खेती से जुड़े हर सामान पर महंगाई बढ़ रही है, लेकिन फसलों के दाम वहीं अटके हुए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जो गलत फैसले लेगी, भाकियू उसका विरोध करेगी।

 

Edited By: Taruna Tayal