मेरठ, जेएनएन। कोरोना संक्रमण के विस्फोट ने मेरठ को सांसत में डाल दिया है। जिले के चप्पे-चप्पे में संक्रमण का अंदेशा उभर आया है। माइक्रोबायोलोजिस्ट भी मानते हैं कि मेरठ में वायरस की कड़ी को तोड़ना आसान नहीं होगा। उधर, डाक्टरों का कहना है कि ऐसे मरीजों से ज्यादा संक्रमण होगा, जिनमें कोरोना एक सामान्य फ्लू की तरह आया और ठीक हो गया।

..संक्रमण के वो सात दिन

संक्रमण की दूसरी कड़ी मेरठ की आबोहवा में 19 मार्च से संक्रमण घूम रहा है। जिसकी पड़ताल 27 मार्च को हो सकी। सात दिनों तक संक्रमित व्यक्ति शहरभर में घूमा। मेडिकल साइंस के मुताबिक पांच दिनों में दूसरे मरीजों में भी लक्षण आने लगते हैं। डब्ल्यूएचओ के मानकों पर कसें तो 24 मार्च से एक ही परिवार में दस लोग दूसरों को संक्रमित करने की स्थिति में आ गए। पड़ताल हुई तो पता चला कि 30 मार्च तक 19 मरीजों में वायरस पहुंच चुका है, जबकि इनसे कितनों में पहुंचा, इसकी गणना स्वास्थ्य विभाग की धड़कन बढ़ा देगी।

तीन गुनी घनी आबादी है खतरनाक

एक वैज्ञानिक गणना के मुताबिक एक संक्रमित व्यक्ति 130-150 व्यक्ति वर्ग किमी घनत्व में माहभर में 406 नए मरीज बना सकता है, किंतु मेरठ की आबादी करीब एक हजार व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है। ऐसे में संक्रमण की गति भी तीन गुना होगा। एक आकलन के मुताबिक अगर सभी 19 मरीज घूम रहे होते तो यही दस हजार नए मरीज बना सकते थे। इसी वजह से आइसोलेशन या क्वारंटाइन किया जाता है। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि एक मरीज सात से लेकर 37 दिनों तक वायरस का संक्रमण फैला सकता है।

..वो जो पकड़ में अब तक नहीं हैं

विदेश से मेरठ पहुंचने वालों की संख्या आठ सौ से ज्यादा मिली है। जिसमें दो में कोरोना मिल चुका है। सभी क्वारंटाइन में बेशक रखे गए हैं, किंतु यहां भी परिवार रिस्क में होता है। इटली, स्पेन, यूएसए, इंग्लैंड, ईरान, फिलीपींस, सिंगापुर जैसे 14 सबसे संक्रमित देशों से आए मरीजों के लिए अलग क्वारंटाइन हाल बनाने की बात की गई थी। छह हजार से ज्यादा लोग महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, गुजरात एवं नई दिल्ली से आए हैं, जहां वायरस खतरनाक रूप से बढ़ा। विशेषज्ञों की मानें तो इनमें एक अगर दस लोगों में भी संक्रमण लगा होगा तो पूरा शहर खतरे के मुहाने पर पहुंच जाएगा।

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