मेरठ,जेएनएन। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका तेज होती जा रही है। प्रशासन ने निजी अस्पतालों को उनके कोविड केंद्र अपग्रेड करने के लिए आदेशित कर दिया है। कोविड के करीब तीन हजार बेड निजी अस्पतालों में उपलब्ध हैं। कोरोना के इलाज के लिए पंजीकृत 31 में 26 कोविड केंद्र निजी अस्पतालों में हैं। कई अस्पतालों ने कैंपस में आक्सीजन प्लांट लगवा लिया है। आइएमए के साथ लगातार हुई बैठक

सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बताया कि दूसरी लहर में कोविड केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई। निजी अस्पतालों के सहयोग के बिना कोरोना से मुकाबला नहीं हो सकता। दूसरी लहर में मरीजों की संख्या अचानक बढ़ने और आक्सीजन की कमी से बड़ी संख्या में मरीजों की मौत हो गई। स्वास्थ्य विभाग ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, नर्सिग होम एसोसिएशन एवं निजी डाक्टरों के साथ वार्ता कर तीसरी लहर से निपटने का फार्मूला बनाया है। प्रोटोकाल के मुताबिक 94 फीसद आक्सीजन सेचुरेशन वाले मरीजों का होम आइसोलेशन में इलाज होगा। सिर्फ गंभीर मरीजों को ही अस्पतालों में भर्ती किया जाएगा। कोरोना से लड़ाई में फ्रंटफुट पर निजी अस्पताल

मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान ने बताया कि दूसरी लहर में 26 निजी अस्पतालों में कोविड वार्ड संचालित किया गया। संक्रमण थमने के साथ ही अस्पताल इन वार्डो का अपने तरीके से प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन तीसरी लहर आते ही इन्हें फिर से कोविड वार्ड में बदल दिया जाएगा। गढ़ एवं हापुड़ रोड पर आनंद अस्पताल, न्यूटिमा, अजय, दयावती सुपरस्पेशियलिटी, संतोष, जगदंबा व लोकप्रिय, वहीं बागपत रोड पर केएमसी व सिरोही नर्सिग होम समेत कई केंद्र खुले। गंगानगर में अप्सनोवा, बाईपास पर कैलाशी, एसडीएस ग्लोबल, फ्यूचर और आर्यावर्त और बीच शहर में होप और धन्वंतरि जैसे अस्पताल कोरोना के इलाज में आगे आए। हालांकि कई निजी अस्पतालों पर मरीजों से ज्यादा चार्ज वसूलने के गंभीर आरोप भी लगे, जिसकी जांच चल रही है। मोनोक्लोनल एंटीबाडी तक दी जा चुकी

-कोरोना के इलाज में निजी अस्पतालों ने हर थेरपी को आजमा लिया है। गत दिनों मेरठ के एक डाक्टर दंपती को सवा लाख रुपये में आने वाले मोनोक्लोनल एंटीबाडी लगाई गई, जिसकी पूरे पश्चिम उप्र में चर्चा रही।

-प्राइवेट अस्पतालों में वेंटिलेटर, हाई फ्लो नेजल कैनुला, बाईपैप, हर बेड तक आक्सीजन पाइपलाइन, मानीटर के साथ ही रेमडेसिविर इंजेक्शन, टोसिलिजुमैब, भाप की मशीन, आयुर्वेदिक काढ़ा तक उपलब्ध कराया गया। बड़ी संख्या में मरीजों की जान भी बची।

-प्रशासन की निगरानी में कई निजी अस्पतालों में पीडियाट्रिक आइसीयू खोला जा रहा है, जिसे बाल रोग विशेषज्ञ संभालेंगे। उन्हें प्रशिक्षित भी किया गया। बच्चों को देखते हुए छोटे आकार वाले मास्क, वेंटिलेटर मंगाए गए हैं।

-दर्जनभर अस्पतालों ने कैंपस में ही आक्सीजन प्लांट लगा लिया है। ये प्लांट हवा से रोजाना सौ सिलेंडर भरने में सक्षम होंगे। पैरामेडिकल स्टाफ को आइसीयू केयर में प्रशिक्षित किया गया है। इनका कहना-

निजी अस्पतालों की भागीदारी बेहद जरूरी है। कोरोना की दूसरी लहर में मेडिकल कालेज ने एल-3 के रूप में काम किया, वहीं दर्जनों निजी अस्पतालों ने एल-3 जैसी सुविधा देते हुए मरीजों का इलाज किया। निजी अस्पतालों के साथ कई दौर की बैठक हुई। पीकू पर खास फोकस के लिए कहा गया है।

डा. अखिलेश मोहन, सीएमओ

Edited By: Jagran