यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 26, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
मेरठ में आज से शुरू होगी पोलियो वायरस की तलाश
दो वर्ष पहले हैदराबाद एवं दिल्ली के नालों में पोलियो के जीवित वायरस मिले थे, मेरठ को भी इस बीमारी के हाई रिस्क जोन में माना जाता है।

मेरठ [संतोष शुक्ल]। भारत भले ही पोलियो मुक्त माना जा रहा, किंतु इसके संक्रमण का खतरा बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मेरठ में भी पोलियो वायरस की आशंका जताई है। इसके लिए हापुड़ बस अड्डा पंपिंग स्टेशन से सैंपल भरा जाएगा। मंगलवार को टीम पहला सैंपल भरेगी, जिसकी रिपोर्ट 15 दिन में जारी होगी।
दो वर्ष पहले हैदराबाद एवं दिल्ली के नालों में पोलियो के जीवित वायरस मिले थे। मेरठ को भी इस बीमारी के हाई रिस्क जोन में माना जाता है। 2013 में मुंबई और डब्ल्यूओ की टीम ने मेरठ की 400 से ज्यादा लैबों, डीप फ्रीजरों एवं कोल्ड स्टोरों में वायरस की जांच की थी। अब यूपी में मेरठ, आगरा, इलाहाबाद, बनारस, लखनऊ, गाजियाबाद एवं गौतमबुद्धनगर समेत छह शहरों में ऐसे स्पॉट को चिन्हित किया गया है, जहां वाइल्ड वायरस मिल सकता है।
छह स्थानों में से चुना गया पंपिंग स्टेशन: हापुड़ बस अड्डे के आसपास अतीत में सर्वाधिक पोलियो केस मिले थे, इसीलिए आशंका अब भी है। गत वर्ष वाइल्ड पोलियो वैक्सीन कई स्थानों पर फेंकी हुई मिली थी, जो संक्रमण का कारण बन सकती है। इसीलिए अब पोलियो इंजेक्शन दिया जा रहा है, जिसमें मृत वायरस होता है। डब्ल्यूएचओ ने नौ माह पहले मेरठ में छह नालों की मानीटरिंग की, किंतु इसमें केमिकल की मात्र ज्यादा मिलने से पोलियो वायरस के नष्ट होने की आशंका बन गई। जबकि जीवित वायरस के सर्विलांस के लिए हापुड़ पंपिंग स्टेशन चुना गया।
मेरठ में 856 रिस्क स्पॉट: हैदराबाद के नाले में 2015 में टाइप-दो पोलियो वायरस मिला था। इसके बाद देशभर में डब्ल्यूएचओ एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमें एक्टिव हो गईं। मेरठ में 856 स्थानों को हाई रिस्क स्पाट बताते हुए केन्द्र को रिपोर्ट भेजी। इसमें ईंट भट्ठों, कंस्ट्रक्शन साइट, घुमंतू गिरोह के डेरों एवं शहरी क्षेत्र के तमाम मोहल्लों का नक्शा भी सरकार के पास भेजा गया। गत दिनों मेरठ में ट्राइवैलेंट वैक्सीन नष्ट करने के बजाय लोगों ने वेस्टेज में फेंका, इससे भी संक्रमण का रिस्क है। डब्ल्यूएचओ के अधिकारी डा. रजत ने बताया कि देशभर में 35 स्थानों पर पोलियो वायरस का सर्विलांस किया जा रहा है।
हर माह 300 सैंपल की जांच: एक्यूट फ्लेसिड पैरालसिस या एएफसी के केस में बच्चों का हाथ पांव लुंजपुंज पड़ जाता है। इसके लक्षण काफी हद तक पोलियो जैसे होते हैं, ऐसे में इन बच्चों की स्टूल पोलियो वायरस की जांच होती है। विभाग हर माह करीब तीन सौ बच्चों को संदिग्ध मानते हुए इसकी जांच कराती है।
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क्या कहते हैं अधिकारी: सीएमओ डॉ. राजकुमार कहते हैं, हापुड़ बस अड्डे का पंपिंग स्टेशन पोलियो वायरस के लिए संवेदनशीन माना गया है। डब्ल्यूएचओ की टीम मंगलवार को यहां से सैंपल भरेगी, जिसकी जांच दिल्ली स्थित एनसीडी लैब में होगी। वाइल्ड वायरस नाले के पानी में पकड़ में आ सकता है। हर माह सैंपल लिए जाएंगे।