शामली, जेएनएन। सांप्रदायिक वैमनस्य और पुलिस की विवादित कार्यशैली की खबरें अक्सर सुनने को मिलतीं हैं, लेकिन हाल ही में पेश आया वाकया इन दोनों विकारों को सिरे से खारिज कर रहा है। खून की कमी के चलते एक गर्भवती मुस्लिम महिला मौत के कगार पर पहुंच गई थी। पुलिस के दो आला अफसरों और तीन हिूदु भाइयों ने अपना खून देकर उसकी जिंदगी को फिर से हरा-भरा कर दिया।

रक्‍त देकर बचाई जिंदगी

गढ़ीपुख्ता क्षेत्र के राझड़ गांव निवासी 27 वर्षीय मोहसिना पत्नी फरीद गर्भवती थी। शनिवार को तबियत बिगडऩे पर परिजन उसे शामली के ग्लोबल शांति केयर अस्पताल लेकर पहुंचे। उसका हीमोग्लोबिन मात्र 4.2 ग्राम निकला। बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो गई। डिलीवरी के लिए हीमोग्लोबिन नौ ग्राम तक होना जरूरी होता है। ऐसे में चार यूनिट रक्त चढ़ाया गया। इसके बाद प्रसव कराया गया। इसके बाद भी मोहसिना और परिवार की दुश्वारियां कम नहीं हुई। प्लेटलेट्स नीचे गिरते हुए 21 हजार हो गई। हालत बिगड़ रही थी। एबी पॉजिटिव रक्त से प्लेटलेट्स की जरूरत थी। परिजन काफी प्रयास करते रहे, लेकिन प्रबंध नहीं हो सका। अस्पताल संचालक कुशांक चौहान ने रक्त की जरूरत के मैसेज सोशल मीडिया पर चलाए।

सूचना पाते ही खून देने पहुंच गए अस्‍पताल

रविवार दोपहर में सूचना सीओ कैराना प्रदीप सिंह और गढ़ीपुख्ता थानाध्यक्ष संदीप बालियान को मिली। सूचना मिलते ही वह अस्पताल पहुंच गए। महिला के पति फरीद के साथ मेरठ रोड स्थित सर्वोदय ब्लड बैंक पहुंचे। यहां पर एक-एक यूनिट रक्तदान किया। पूर्व सभासद कांधला पिंटू गोयल, बीएड कॉलेज जसाला के प्राचार्य श्रवण कुमार और व्यापारी श्याम सिंघल ने भी अस्पताल पहुंचकर ब्लड डोनेट किया। पांच यूनिट रक्त से प्लेटलेट्स मोहसिना को चढ़ाई गई। पति फरीद की आंखें नम थी और बार-बार सभी रक्तदाताओं को धन्यवाद कर रहे थे। अस्पताल संचालक कुशांक चौहान ने बताया कि महिला की हालत में अब सुधार हो रहा है। 

Posted By: Prem Bhatt

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