मेरठ। लोकल कनेक्टिविटी योजना में शामिल परतापुर स्थित डा. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी से छोटे विमान उड़ान की स्थिति तो भंवर में है ही, प्रशिक्षण और कमर्शियल उड़ान पर भी ग्रहण लग सकता है। दिल्ली की निजी प्रशिक्षण कंपनी ने अनुबंध नवीनीकरण के नोटिस को फिलहाल शासन को वापस कर दिया है। इससे अप्रैल में खत्म हो रहा अनुबंध खटाई में पड़ गया है।

प्रदेश सरकर के स्वामित्व वाली हवाई पट्टटियों को उड्डयन प्रशिक्षण कार्यक्रम और वायुयान अनुरक्षण प्रशिक्षण आदि कार्यक्रमों के लिए निजी संस्थाओं को उपयोग के लिए किराए पर दिया जाता रहा है। इसके लिए बाकायदा अनुबंध किया जाता है। पांच वर्ष पहले डा. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी को लेकर किया गया अनुबंध 20 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। नागरिक उड्डयन विभाग उत्तर प्रदेश ने दिल्ली की निजी कंपनी पंख एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस भेजकर नई शर्तो के अनुसार अनुबंध का नवीनीकरण करने के लिए कहा था। कंपनी ने तीन बार भेजे गए नोटिसों का कोई जवाब नहीं दिया। चौथे नोटिस को कंपनी ने वापस कर दिया है। ऐसे में अब शासन ने वित्त नियंत्रक बीआर प्रसाद के माध्यम से अनुबंध समाप्ति का नोटिस भेजकर कंपनी को एक तरह से चेतावनी दी है। उधर, लोकल कनेक्टिविटी को लेकर भी अफसर कुछ स्पष्ट नहीं कर पा रहे हैं। दो दिन पहले शहर में प्रदेश सरकार के मंत्री ने उडान के सवाल पर गोलमोल जवाब दिया था।

अनुबंध फीस में 50 प्रतिशत की वृद्धि

हवाई पट्टटियों को निजी संस्थानों को प्रशिक्षण उड़ान के लिए किराये पर देने के लिए तमाम नियम निर्धारित किए गए हैं। पांच वर्ष के लिए होने वाले अनुबंध के नवीनीकरण के समय पचास फीसदी फीस में वृद्धि की जाएगी। अनुबंध के फिर से नवीनीकरण के लिए कंपनी को 33 लाख 75 हजार रुपये के साथ बैंक गारंटी भी जमा करानी होगी। तमाम शर्तो को पूरा करने के बाद ही करीब 66 माह के लिए नए अनुबंध का नवीनीकरण किया जा सकेगा।

खाली कराएंगे उड़ान परिसर

नागरिक उड्डयन विभाग उत्तर प्रदेश ने हवाई पट्टी को लेकर कंपनी के साथ जिला प्रशासन को भी विशेष रुप से निर्देशित किया है। अनुबंध का नवीनीकरण न होने पर 21 अप्रैल को पंख एविएशन एकेडमी को हर हाल में हवाई पट्टी परिसर का खाली करना होगा। इसके लिए जिलाधिकारी के साथ प्रभारी अधिकारी सिटी मजिस्ट्रेट को भी निर्देश जारी किए गए हैं।

प्रभारी अधिकारी व सिटी मजिस्ट्रेट एमपी सिंह ने कहा कि परतापुर हवाई पट्टी का प्रशिक्षण से अधिक कमर्शियल उड़ान के लिए प्रयोग होता है। अनुबंध को शासन के निर्देश प्राप्त हो चुके हैं, हालांकि हवाई पट्टी एएआई (एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया) को स्थानांतरित की जा चुकी है।

Posted By: Jagran