बागपत, जागरण संवाददाता। रविवार से तेज हवा के साथ रुक-रुक कर हो रही बारिश से हजारों एकड़ भूमि में तैयार खड़ी धान की फसल गिर गयी है। वहीं खेत पानी से लबालब होने के कारण फसल की कटाई का कार्य रुक जाने से किसानों को भारी नुकसान की संभावना है।

खेकड़ा तहसील क्षेत्र में गन्ने की फसल के साथ साथ बड़ी तादाद में किसान धान की फसल बोते हैं। खेकड़ा के साथ साथ रटौल, ढीकोली, मुबारिकपुर, बड़ागांव लहचोडा, मंसूरपुर, ललियाना, गौना आदि गांवों में हजारों एकड़ भूमि में किसान ने धान की फसल बोई हुई है। इस समय धान की ज्यादातर फसल खेतों में तैयार खड़ी हैं। कुछ किसान फसल को काटने में लगे हैं। रविवार तड़के लगभग चार बजे से तेज हवा के साथ रुक-रुक कर बारिश हो रही है। जिससे किसानों की धान की फसल गिर गयी है। साथ ही खेत जलमग्न होने से फसल के खराब होने की संभावना बन गयी है।

आलू की बुआई भी पिछड़ी

इसके अलावा खेतों में पानी भरा होने से फसल की कटाई का कार्य रुक गया है।

किसानों का कहना है। पूर्व में हुई बारिश से अन्य फसल बर्बाद होने से किसान बेहाल है, लेकिन अब बेमौसम बारिश ने ताबूत में कील ठोकने का काम किया है। आलू की फसल बोने की तैयारी कर रहे किसानों के फसल बोने में पिछड़ने की संभावना बन गयी है। आलू उत्पादक राजू सैनी, हाजी मुज्जकिर व ओमदत्त आदि ने बताया कि खेत मे पड़ा बीज के बारिश से खराब होने की संभावना बन गयी है।

उर्द की फसल में पीलेपन से किसानों की बढ़ी चिंता

बागपत। चौगामा क्षेत्र में लहलहा रही उर्द की फसल के पत्तों पर पीलापन आने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। उर्द की फसल का रंग बदलने से परेशान किसान कीटनाशक दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं। रोगग्रस्त फसल से पैदावार में गिरावट आने का उन्हें डर सता रहा है।

चौगामा क्षेत्र में इस बार काफी संख्या में किसानों ने उर्द की फसल बो रखी है। किसानों का मानना है की फसल पर पीलापन आने से फूल एवं फलियां कम बनेंगी। इससे अधिकांश पौधे तो सूखने लगे हैं। जो बचे हैं, तो उनपर फलियां बनने के आसार घट गए हैं। बताया कि उर्द के पौधों की पत्तियों में भी छिद्र बनते जा रहे हैं। इस संबंध में कृषि विशेषज्ञ खेकड़ा डा. संदीप चौधरी ने बताया की उर्द की पत्तियों पर पीलापन रोग सफेद मक्खी के द्वारा फैलता है, जिसे यलो वेन मोजेक रोग कहते हैं। इसी मक्खी के द्वारा अन्य पौधों में भी यह रोग फैलता है। इसके नियंत्रण के लिए कीटनाशक इमिडाक्लोप्रिड की मात्रा को एक एम एल प्रति लीटर पानी की दर से मिलाकर पौधों पर स्प्रे करना चाहिए। इसके साथ ही रोगग्रस्त पीले पौधे को उखाड़कर दूर ले जाकर मिट्टी में दबा देना चाहिए। इस ग्रसित पौधों पर आई फलियों में दाना नहीं बनता है।

 

Edited By: Taruna Tayal