बूढ़ी गंगा को मिला न्याय: बाढ़ मैदान पर काटे गए 43 गांवों के पट्टे होंगे निरस्त, अतिक्रमण पर रोक
एनजीटी के आदेश पर बूढ़ी गंगा को उसका हक मिला है, जिसके तहत 43 गांवों में उसके बाढ़ मैदान पर काटे गए पट्टे निरस्त होंगे।
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प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
जागरण संवाददाता, मेरठ। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश शासन के सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने बूढ़ी गंगा के 100 वर्षीय रिटर्न पीरियड के आधार पर उसके बाढ़ मैदान के वैज्ञानिक सीमांकन एवं अधिसूचना से संबंधित शासनादेश जारी कर दिया है।
एनजीटी में तीन साल तक चले केस के बाद बूढ़ी गंगा को उसका हक मिला है। मेरठ के मवाना क्षेत्र के 43 गांवों में बूढ़ी गंगा की जमीन पर काटे गए पट्टे निरस्त होंगे और आगे से यदि कोई गंगा की जमीन पर अतिक्रमण करेगा तो वह अवैध माना जाएगा।
बूढ़ी गंगा नदी के सीमांकन का निर्देश
शोभित यूनिवर्सिटी के प्रो. प्रियंक भारती ने बताया कि बूढ़ी गंगा को दोबारा जीवित करने के लिए उन्होंने पहले अधिकारियों के चक्कर लगाए। जब किसी ने नहीं सुनी तो वह एनजीटी गए। एनजीटी ने जिला प्रशासन मेरठ से रिपोर्ट मांगी।
जिला प्रशासन ने रिपोर्ट में बताया कि यहां से बूढ़ी गंगा नहीं निकल रही है, केवल नदी नाव की जल धारा है। इसके बाद प्रियंक भारती ने 17वीं शताब्दी से लेकर 19वीं शताब्दी तक के नक्शे एनजीटी मे पेश किए।
इनसे साबित होता है कि बूढ़ी गंगा नदी मुख्य गंगा नदी की सहायक नदी है। इसके बाद एनजीटी ने प्रदेश के विशेष सचिव ने मुजफ्फरनगर, हापुड़, अमरोहा और मेरठ के डीएम को निर्देश दिए कि बूढ़ी गंगा नदी की सीमांकन किया जाए। कुछ स्थानों पर पिलर लगा दिए गए है। प्रियंक भारती का कहना है कि अब बूढ़ी गंगा की जमीन कब्जा मुक्त हो जाएगी।
मवाना क्षेत्र के 43 गांवों से निकल रही नदी, काट दिए पट्टे
मवाना क्षेत्र के 43 गांवों से होकर बूढ़ी गंगा नदी निकल रही है। इसमें जिला प्रशासन ने पट्टे काटकर किसानों को बांट दिए थे। कुछ पट्टों के निरस्त होने की रिपोर्ट चली गई है और कुछ की जानी अभी बाकी है। इन गांवों के सभी पट्टे निरस्त करके बूढ़ी गंगा की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाएगा।
