मेरठ,जेएनएन। मेरठ से हवाई उड़ान के सपने को साकार करने की दिशा में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआइ) ने एक अहम कदम आगे बढ़ाया है। मेरठ में हवाई अड्डे का नया मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है। मेरठ से उड़ान का सपना जल्द ही पूरा होता नजर आएगा।
एएआइ ने प्रदेश सरकार को लिखा पत्र
हवाई अड्डे की खातिर आवश्यक भूमि के लिए एएआइ ने प्रदेश सरकार को 15 मई को पत्र भी लिख दिया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि हवाई अड्डे का निर्माण दो चरणों में होगा और पहले चरण के लिए मौजूदा हवाई अड्डे से इतर और 282.73 एकड़ भूमि की आवश्यकता है।
जूम एयर ने सेवा पर जताई सहमति
भूमि उपलब्ध होते ही हवाई अड्डे का निर्माण एएआइ शुरू कर देगी। जानकारों का कहना है कि आवश्यक भूमि मिलने के बाद लगभग एक वर्ष का समय निर्माण कार्य में लग जाएगा। बता दें कि काफी प्रयास के बाद इसी वर्ष फरवरी ने मेरठ से हवाई उड़ान के लिए भी बिड निकाली गई थी। इसमें फरवरी के अंत में मेरठ से लखनऊ और प्रयागराज के बीच रूट को मंजूरी मिली और इस रूट पर जूम एयर ने सेवा देने की सहमति जताई।
50 सीटर संचालन का प्लान
इस प्रगति के बाद ही एएआइ और जूम एयर की सात सदस्यीय टीम ने मेरठ की मौजूदा हवाई पट्टी का दौरा किया और यहां की स्थितियों को जांचने-परखने के बाद सीआरजे-200 प्लेन (50 सीटर) संचालन के लिए नया मास्टर प्लान तैयार किया गया है और उसी के आधार पर आवश्यक जमीन अधिग्रहण के लिए प्रदेश सरकार को पत्र लिखा गया है।माना जा रहा है कि आचार संहिता के खत्म होते ही प्रदेश सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाएगी। इन्हीं मानकों पर 72 सीटर एटीआर-72 भी ऑपरेट हो सकेगी।
प्रदेश सरकार देगी 600 करोड़ तो उड़ान भरेगा मेरठ
नए मास्टर प्लान के तहत लगभग 330 एकड़ भूमि की आवश्यक हवाई अड्डा निर्माण के लिए है। 47 एकड़ से कुछ कम हवाई पट्टी की भूमि एएआइ को प्रदेश सरकार 4 जुलाई,2014 को सौंप चुकी है। इस बा 282.73 एकड़ भूमि एएआइ ने और प्रदेश सरकार से मुहैया कराने को कहा है। लगभग 86 एकड़ सरकारी भूमि चिह्न्ति है,जिसका स्थानांतरण प्रदेश सरकार द्वारा एएआइ को होना है। ऐसे में शेष लगभग 197 एकड़ भूमि प्रदेश सरकार को अधिग्रहित करनी होगी। औसतन एक एकड़ की कीमत तीन करोड़ रुपये के आसपास आंकी जा रही है।
ऐसे साकार होगा उड़ान का सपना
इस लिहाज से प्रदेश सरकार को 600 करोड़ रुपये मेरठ की हवाई अड्डे के लिए आवंटित करने होंगे तभी उड़ान का सपना साकार हो सकेगा। अब देखना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मेरठ के लिए बजट का प्रावधान करते हैं या फिर मामला लटका रह जाएगा। कुछ जानकारों का कहना है कि 197 एकड़ भूमि में वन विभाग की भी कुछ जमीन है, जिसका विभागीय हस्तांतरण हो सकता है।
मौजूदा हवाई पट्टी की ही बढ़ाएंगे लंबाई-चौड़ाई
नए मास्टर प्लान में तय किया गया है कि मौजूदा हवाई पट्टी का रन-वे ही और लंबा-चौड़ा किया जाएगा। वर्तमान में 1500 मीटर लंबे और 23 मीटर चौड़े रनवे को बढ़ाकर 2050 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इस पर सीआरजे-200 और एटीआर-72 आराम से लैंड कर सकती है।
पराग भी बच जाएगा,गगोल तीर्थ भी यथावत रहेगा
मास्टर प्लान में यह प्रावधान रखा गया है कि हवाई अड्डे की वजह से पराग डेयरी भी प्रभावित न हो और पौराणिक गगोल तीर्थ की जमीन और उसका मेला क्षेत्र भी यथावत रहे। अधिगृहित की जाने वाली भूमि पर पराग डेयरी से आगे टर्मिनल बिल्डिंग बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा फायर स्टेशन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, यात्रियों के वाहनों की पार्किंग,ग्रीन बेल्ट और हैंगर का प्रावधान भी इसमें किया गया है।
इनका कहना है
एएआइ ने नया मास्टर प्लान यूपी सरकार को भेजा है। यह मेरठ के लिए बड़ा मौका है। आचार संहिता खत्म होते ही प्रदेश सरकार से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कराकर इसे जल्द से जल्द धरातल पर उतारने का प्रयास करेंगे। उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है, इस बार मेरठ का सपना साकार हो जाएगा।
- डा.लक्ष्मीकांत बाजपेयी,पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

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Posted By: Ashu Singh

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