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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

प्रदूषण से निपटने की तैयारी, एनसीआरटीसी ने मेरठ में तैनात किए एंटी स्मॉग गन, लगाए वायु गुणवत्ता मापक यंत्र

By Taruna TayalEdited By:
Published: Mon, 15 Nov 2021 02:42 PM (IST)

दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के पूरे 82 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच पर आरआरटीएस का निर्माण जोरों पर चल रहा है। सर्दी के मौसम में ...और पढ़ें

एनसीआरटीसी ने मेरठ में तैनात किए एंटी स्मॉग गन।
एनसीआरटीसी ने मेरठ में तैनात किए एंटी स्मॉग गन।

मेरठ, जेएनएन। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ के पूरे 82 किलोमीटर लंबे स्ट्रेच पर आरआरटीएस का निर्माण जोरों पर चल रहा है। सर्दी के मौसम में लगातार बढ़ते स्मॉग से निपटने के लिए वर्तमान में 20 से अधिक एंटी-स्मॉग गन तैनात हैं। निर्माण स्थलों पर लगातार चौबीसों घंटे पानी का छिड़काव किया जा रहा है। स्थलों और सड़क किनारे जमा हुई मिट्टी को ब्रूमर मशीन से हटाने की भी व्यवस्था की गई है। कई जगहों पर वायु गुणवत्ता मॉनिटर भी लगाए गए हैं ताकि हवा की गुणवत्ता पर नजर रखी जा सके।

सभी कच्चे माल, मलबे को उनके चिन्हित स्थल पर ढक कर रखा जाता है। पीयूसी प्रमाणित वाहनों और उचित रखरखाव वाले डीजी सेट का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण और तोड़ फोड़ से निकले मलबे को निर्धारित नियमों के अनुसार एकत्र करके निस्तारण किया जाता है। प्रत्येक कास्टिंग यार्ड में पानी के पंप भी स्थापित किए गए हैं, विशेष रूप से मिट्टी से लदे भारी ट्रक ट्रेलरों के टायर धोने के लिए, जो सेगमेंट, सीमेंट, रेत आदि ले जाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इससे कॉरिडोर के आस-पास के क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की गंदगी को फैलने से रोकने में मदद मिलती है।

प्री कास्ट तकनीक से धूल रेत उड़ने से हो रहा बचाव

एनसीआरटीसी, आरआरटीएस निर्माण में प्री-कास्ट तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। कास्टिंग यार्ड में विशाल संरचनाओं (स्टेशनों / वायडक्ट / सुरंगों) के खंडों को नियंत्रित वातावरण में तैयार किया जाता है। साइटों पर निर्माण गतिविधियों को सीमित करने के इस रणनीतिक निर्णय से सीमेंट, रेत आदि जैसे कच्चे माल की व्यवस्थित हैंडलिंग और प्रसंस्करण भी होता है।

सीएपी का हिस्सा है एनसीआरटीसी, भविष्य में कम होगा प्रदूषण

एनसीआरटीसी दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए 'व्यापक कार्य योजना' (सीएपी) और एनसीआर' और 'दिल्ली में भीड़भाड़ कम करने पर उच्चाधिकार प्राप्त समिति' का हिस्सा है।

रेल आधारित परिवहन प्रणाली होने के कारण इसमें सड़क वाहनों की तुलना में जीवाश्म ईंधन की खपत का 1/5वां हिस्सा होगा। ग्रीन हाउस गैस (जीएचजी) के शून्य उत्सर्जन को सुनिश्चित करने के सभी प्रयासों के साथ, आरआरटीएस कार्बन क्रेडिट अर्जित करने का प्रयास करेगा। दिल्ली-मेरठ आरआरटीएस कॉरिडोर के कार्यान्वयन से कॉरिडोर के साथ सार्वजनिक परिवहन उपयोग की हिस्सेदारी 37% से बढ़कर 63% होने का अनुमान है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर अनुमानित दैनिक सवारियां 2025 में 8 लाख हो जाएंगी।