वकील रेखा जैन की दलीलों के बावजूद मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा, पंजाब से बंगाल तक के मामले बहस में शामिल
मेरठ कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को सौरभ हत्याकांड में फांसी की सजा सुनाई है। बचाव पक्ष ने उनके आपराधिक ...और पढ़ें

HighLights
मेरठ कोर्ट ने मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा दी।
बचाव पक्ष ने आपराधिक इतिहास और अच्छे आचरण का तर्क दिया।
अभियोजन ने हत्या की क्रूरता और सुप्रीम कोर्ट के फैसले रखे।
जागरण संवाददाता, मेरठ। मुख्य प्रतिरक्षा अधिवक्ता रेखा जैन ने अदालत में मुस्कान और साहिल के बचाव में कहा कि दोनों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। उन्होंने बताया कि दोनों की उम्र 28 साल है और वे छात्र हैं। दोनों ने स्नातक तक पढ़ाई की है।
जैन ने अदालत से मुस्कान की दो बेटियों के बारे में भी विचार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि घटना से जुड़ा कोई आपराधिक साक्ष्य नहीं है। दोनों के जेल में आचरण का विवरण भी अदालत के सामने रखा गया। जेल प्रशासन ने उनके आचरण को अच्छा बताया है।
मध्य प्रदेश और पंजाब के मामलों का जिक्र
रेखा जैन ने मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित बीएससी के छात्र अमन दांगी हत्याकांड का भी जिक्र किया है। इस हत्याकांड में मुख्य आरोपित रजत सैनी को फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिस पर अदालत ने निर्देश दिया था कि सजा तय करते समय अपराधी के सुधरने की संभावना, उम्र और अपराध से जुड़े हालत पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। इसी तरह से नौ मई 1980 पंजाब के बच्चन सिंह बनाम पंजाब राज्य के ऐतिहासिक मामले को भी कोर्ट में रखा गया।
बहस में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का जिक्र
उसके जवाब में सौरभ की तरफ से डीजीसी केके चौबे ने मृत्युदंड की मांग के समर्थन में महेश बनाम मध्य प्रदेश राज्य, बंटू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, खुशविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य और धनंजय चटर्जी बनाम पश्चिम बंगाल राज्य समेत सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला दिया है।
इन फैसलों के माध्यम से अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता, समाज पर प्रभाव और दुर्लभतम मामलों में मृत्युदंड दिए जाने के कानूनी सिद्धांतों को सामने रखा गया है।
बताया गया कि सौरभ की हत्या में क्रूरता भी कांप गई थी। नींद की गोलियां देखकर चाकू से हत्या की गई। उसके बाद शरीर के चार टुकड़े कर दिए। दोनों हाथ और गर्दन को बैग में रखकर साहिल अपने घर पर लाया था। उसके अगले दिन दोबारा से बैग को वापस ले गए और नीले ड्रम में सीमेंट से जमा दिया था।
