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मेरठ में किसान नेता से SSP और SOG दफ्तर में मारपीट के आरोप के बाद सियासत गरमाई, MLA अतुल प्रधान ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

By Sushil Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 21 Aug 2026 01:53 PM (IST)

Meerut News: किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव की कथित पिटाई के बाद सपा विधायक अतुल प्रधान ने पुलिस ...और पढ़ें

अपने आवास पर प्रेसवार्ता करते सरधना विधायक अतुल प्रधान।

अपने आवास पर प्रेसवार्ता करते सरधना विधायक अतुल प्रधान।

HighLights

  1. बोले- लोकतंत्र में पुलिस को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी चाहिए।

  2. दिग्विजय भाटी का पुलिसकर्मियों पर फिल्मी गाने पर डांस कराने का भी आरोप। 

जागरण संवाददाता, मेरठ। किसान नेता दिग्विजय भाटी और मोहित जाटव की कथित पिटाई के बाद सपा विधायक अतुल प्रधान ने अपने आवास पर प्रेसवार्ता कर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार के प्रमुख पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज हो सकते हैं। केवल मुकदमा दर्ज होने से कोई व्यक्ति अपराधी नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि किसान नेता के खिलाफ मुकदमे दर्ज होने का हवाला देकर उनके साथ कथित तौर पर बर्बरता करना गलत है और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

दिग्विजय भाटी ने आरोप लगाया कि बुधवार को वह मोहित जाटव के साथ पुलिस कार्यालय पहुंचे थे। उस समय एसएसपी अविनाश पांडेय कार्यालय में नहीं थे। करीब पांच मिनट बाद एसएसपी अविनाश पांडेय वहां पहुंचे।

भाटी के अनुसार, एसएसपी ने उन पर जनपद में तांडव मचाने और नेता बने घूमने की टिप्पणी की। इसके बाद आरोप है कि उन्हें मारपीट करते हुए कार्यालय के एक कक्ष में ले जाया गया और वहां भी पिटाई की गई।

भाटी का आरोप है कि इसके बाद उन्हें एसओजी कार्यालय ले जाया गया, जहां इंस्पेक्टर अखिलेश गौड़ और पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया।

दिग्विजय भाटी ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उनसे फिल्मी गाने पर डांस कराया। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।

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अतुल प्रधान ने कहा कि लोकतंत्र में पुलिस को कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान नेता के खिलाफ दर्ज मुकदमों को आधार बनाकर उनके साथ कथित रूप से बर्बर व्यवहार किया गया।

उन्होंने ऐसे अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तथा दोषी पाए जाने पर बर्खास्तगी की मांग की।

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