मेरठ, [अम‍ित त‍िवारी]। एशियन गेम्स 2018 का मिशन पूरा करने के बाद इक्वेस्टियन फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईएफआइ) की ओर से राइडर्स को मिशन ओलंपिक्स का नया टारगेट दिया जा रहा है। इसके लिए भारतीय घुड़सवारी के स्तर को बढ़ाया जा रहा है जिससे देश के घुड़सवार अंतरराष्ट्रीय फलक पर प्रतिभाग करने और पदक जीतने की दावेदारी कर सकें। ईएफआइ की ओर से आरवीसी सेंटर एंड कालेज में संचालित इक्वेस्टियन नोड में घुड़सवारों को निरंतर प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है। जर्मन व फ्रांस के अंतरराष्ट्रीय कोच के बाद वर्तमान में इंग्लैंड के जॉन स्टील भारतीय घुड़सवारों को ट्रेनिंग दे रहे हैं। यह ट्रेनिंग अब पूरे साल बदस्तूर जारी रहेगी।
बदल गया घुड़सवारी का स्तर
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घुड़सवारी के खेल से अधिक से अधिक देशों को जोड़ने के लिए घुड़सवारी की अंतरराष्ट्रीय संस्था फेडरेशन इक्वेस्टर इंटरनेशनेल (एफईआइ) ने कुछ बदलाव किए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर की घुड़सवारी प्रतियोगिता कांकर काम्प्लेट इंटरनेशनल (सीसीआइ) के मानकों में कुछ बदलाव करते हुए अब इसे फाइव स्टार गेम बना दिया गया है। इसमें सीसीआइ फोर-स्टार को ही फाइव स्टार बनाते हुए सीसीआइ वन-स्टार को थोड़ा आसान किया गया हे। भारत में जो नोविस इवेंटिंग होता था वह अब सीसीआइ वन-स्टार इंट्रो बन गया है। भारत में अब तक सीसीआइ के टू-स्टार चैंपियनशिप ही होते थे लेकिन साल 2019 से थ्री-स्टार इवेंटिंग प्रतियोगिताएं होंगी। थ्री-स्टार की पहली प्रतियोगिता बेंगलुरू में 15 मार्च से 25 मार्च तक आयोजित की जाएगी।
मार्च में बेंगलुरू में होगी साल 2019 पहली थ्री-स्टार घुड़सवारी प्रतियोगिता
यह है सीसीआइ गेम्स के मानक

  • गेम- ऊंचाई
  • सीसीआइ वन-स्टार इंट्रो -1.05 मीटर
  • सीसीआइ टू-स्टार -1.10 मीटर
  • सीसीआइ थ्री-स्टार -1.15 मीटर
  • सीसीआइ फोर-स्टार -1.20 मीटर
  • सीसीआइ फाइव-स्टार -1.20 मीटर

केवल इंग्लैंड में फाइव स्टार इवेंट
एशियन गेम्स में अब तब सीसीआइ वन-स्टार स्तर की घुड़सवारी होती थी जो अब टू-स्टार हो गया है। सीसीआइ टू, थ्री व फोर स्टार इवेंट में लांग व शॉर्ट दोनों होता है। शॉर्ट इवेंट में क्रॉस कंट्री की दूरी कम होती है जबकि जंपिंग की बाधाएं अधिक होती हैं। ओलंपिक्स में सीसीआइ फोर-स्टार होता है। सीसीआइ फाइव-स्टार का इवेंट केवल इंग्लैंड के बैडमिंटन व बर्गली में ही होता है।
घोड़ों के वेलफेयर पर अधिक जोर
अंतरराष्ट्रीय संस्था से मान्यता प्राप्त इंटरनेशनल इक्वेस्टियन जज कर्नल दुष्यंत बाली के अनुसार दुनिया भर में घोड़ों के वेलफेयर पर अधिक जोर दिया जा रहा है। इवेंटिंग के ड्रेसाज, क्रॉस कंट्री या जंपिंग में जब भी घोड़े मुंह अथवा फ्लैंक (घोड़े के दाहिने व बाई ओर जहां राइडर का जूता लगता है) में खून दिखते ही उसे प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया जाता है। साथ ही राइडर द्वारा अधिक कोड़ा मारने पर राइडर को भी एलिमिनेट कर दिया जाता है। इसे घोड़े पर अत्याचार मानते हुए राइडर को पहली बार में ही दो महीने तक के लिए प्रतिबंधित किए जाने का प्रावधान है। 

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

budget2021