मेरठ, जेएनएन। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की कवायद शुरू हो गई है। शनिवार को कमिश्नर ने बैठक में सभी विभागों को अपने-अपने प्रोजेक्ट सात नवंबर तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्मार्ट सिटी के प्रबंधन के लिए कमिश्नर की अध्यक्षता में समिति का गठन भी कर दिया गया है। यह समिति विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाकर शासन को अनुमोदन के लिए भेजेगी।

शनिवार को आयुक्त कार्यालय में स्मार्ट सिटी को लेकर बैठक आयोजित की गई। कमिश्नर अनीता सी मेश्राम ने जलापूर्ति के लिए जल निगम, विद्युत आपूर्ति के लिए विद्युत विभाग, स्ट्रीट लाइट, कचरा प्रबंधन, सफाई के नगर आयुक्त, सार्वजनिक परिवहन के लिए परिवहन विभाग, सिटी ट्रांसपोर्ट व रोडवेज के अधिकारियों को और इंटीग्रेटेड टै्रफिक मैनेजमेंट सिस्टम के लिए एमडीए उपाध्यक्ष को, स्वच्छ पर्यावरण के लिए जिला वन अधिकारी को और महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों की सुरक्षा के लिए पुलिस विभाग के अधिकारियों को, स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए अपर निदेशक स्वास्थ्य व जिला विद्यालय निरीक्षक को उनके विभाग द्वारा किए जाने वाले कार्यों के संबंध में प्रारंभिक प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। कहा कि हर हाल में यह रिपोर्ट सात नवंबर को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में प्रस्तुत की जाएगी। इसके अलावा सिटी ट्रांसपोर्ट को यातायात के लिए सॉफ्टवेयर व मोबाइल एप बनाने और वन विभाग को ग्रीन स्पेस पार्क विकसित करने, स्वास्थ्य विभाग को टेलीमेडिसिन पर कार्य करने के लिए भी निर्देशित किया गया। स्मार्ट सिटी योजना में जलापूर्ति, स्वच्छ पर्यावरण, विद्युत आपूर्ति, कचरा प्रबंधन समेत दस कार्यों पर काम किया जाएगा। बैठक में अपर आयुक्त रजनीश राय, नगर आयुक्त डा. अरविंद कुमार चौरसिया, एमडीए उपाध्यक्ष राजेश पाडेय, अपर निदेशक स्वास्थ्य डा. अंजू गुप्ता, जिला वन अधिकारी अदिति शर्मा समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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पांच साल में मिलेंगे 250 करोड़, समिति के माध्यम से होंगे काम

बैठक में कमिश्नर की अध्यक्षता में स्मार्ट सिटी के प्रबंधन के लिए समिति का गठन किया गया। इसमें जिलाधिकारी व नगर आयुक्त सदस्य होंगे। जिलाधिकारी अनिल ढींगरा ने बताया कि नगर स्तर पर स्मार्ट सिटी मिशन का क्रियान्वयन समिति के माध्यम से ही किया जाएगा। योजना, मूल्यांकन, चयन, धनराशि निर्गत कराने, प्रबंध, निगरानी और आंकलन का कार्य समिति करेगी। उन्होंने बताया कि शहर को प्रतिवर्ष 50 करोड़ रुपये मिलेंगे। पांच साल में 250 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।

Posted By: Jagran

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