ग्रैप में डीजल जेनरेटर चलाने पर लगेगा भारी जुर्माना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनसीआर के लिए दी चेतावनी
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चेतावनी दी है कि ग्रैप लागू होने पर डीजल जेनरेटर चलाने पर प्रतिदिन 50,000 रुपये तक का अर्थदंड लगेगा।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
ग्रैप में डीजल जेनरेटर पर 50,000 रुपये तक जुर्माना।
उद्योगों को पीएनजी और बायोमास ईंधन उपयोग की सलाह।
डीजी सेट केवल बिजली गुल होने पर ही चलाए जा सकेंगे।
जागरण संवाददाता, मेरठ। सर्दी का मौसम शुरू होते ही वायु प्रदूषण से वातावरण की स्थिति खराब होने लगती है। पर्यावरण प्रदूषण में मानक के विपरीत चलने वाले डीजल जेनरेटर (डीजी) सेट भी बड़ा कारण बनते हैं।
एनसीआर में डीजी सेट पर पहले से ही प्रतिबंध है। नियम तोड़ने पर अर्थदंड भी लगाया जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चेतावनी जारी की है कि जब एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू होगा, तब डीजल जेनरेटर न सिर्फ सील किए जाएंगे बल्कि अर्थदंड भी दोगुना किया जाएगा।
वर्तमान में 20 से 125 किलोवाट क्षमता के सेट पर 7500 रुपये प्रतिदिन अर्थदंड है लेकिन ग्रैप लागू होने पर इसे बढ़ाकर 15 हजार प्रतिदिन किया जाएगा। 800 किलोवाट पर अभी 25000 अर्थदंड है, तब 50 हजार रुपये लगाया जाएगा। उद्यमियों को एक रजिस्टर बनाना होगा। इसमें डीजी सेट की क्षमता, संचालन की तारीख, कितने समय चलाया, क्यों चलाना पड़ा.. आदि का भी उल्लेख करना होगा।
इसके साथ ही डीजी सेट केवल बिजली गुल होने पर ही वैकल्पिक रूप से चलाया जा सकेगा। उद्योगों को ईंधन के रूप में डीजल के बजाय पीएनजी और बायोमास का उपयोग करने की सलाह दी गई है। डीजी सेट व उपकरणों की जांच के लिए उड़नदस्ता भी इकाइयों में पहुंचेंगे।
जेनरेटर को लेकर ये हैं निर्देश
- 19 किलोवाट से कम के पोर्टेबल सेट ग्रैप प्रतिबंध के दौरान सामान्यतः नहीं चलाए जा सकते। निर्धारित आपातकालीन सेवाओं को छूट है।
- 19 किलोवाट से अधिक लेकिन 41 किलोवाट से कम के सेट डुअल-फ्यूल मोड में ही चलाए जा सकते हैं। गैस की उपलब्धता न होने पर केवल निर्धारित आपातकालीन सेवाओं में शर्तों के साथ उपयोग की अनुमति है।
- 41 किलोवाट से अधिक लेकिन 800 किलोवाट से कम के सेट में डुअल-फ्यूल मोड या प्रमाणित वेंडर से लगवाया गया रेट्रोफिटेड एमिशन कंट्रोल डिवाइस (आरईसीडी) जरूरी है।
प्रतिदिन इतना होगा अर्थदंड
| डीजी सेट (क्षमता) | वर्तमान अर्थदंड (₹) | ग्रैप के दौरान अर्थदंड (₹) |
| 20-125 किलोवाट | 7,500 | 15,000 |
| 125 से 800 किलोवाट | 15,000 | 30,000 |
| 800 किलोवाट से अधिक | 25,000 | 50,000 |
इन्होंने कहा
अक्टूबर से फरवरी तक एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है। इस दौरान उद्योगों पर ग्रैप की नियमावली लागू रहती है। उद्योगों में पीएनजी और बायोमास का उपयोग किया जाए।
-राजेंद्र प्रसाद, क्षेत्रीय अधिकारी, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
मेरठ में अधिकांश उद्योगों के जेनरेटर मानक के अनुसार परिवर्तित कर लिए गए हैं। 100 से अधिक इकाइयों में पीएनजी कनेक्शन हो चुका है। बिजली की आपूर्ति व्यवस्थित की जानी चाहिए।
-गौरव जैन, सचिव, आईआईए मेरठ चैप्टर।
ये नियम भारी उद्योगों के अनुसार हैं, जिसे एमएसएमई पर थोपा गया है। लाग बुक का नियम उचित नहीं है क्योंकि यहां पर बिजली आपूर्ति की व्यवस्था ठीक नहीं है। फिर भी अधिकतर उद्योगों में प्रदूषण नियंत्रण संबंधित मानकों के अनुसार जेनरेटर बदल लिए गए हैं।
-निपुण जैन, अध्यक्ष, परतापुर इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन।
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