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'आज मिली आत्मा को शांति', अमरदीप और रविता को फांसी की सजा के बाद बोलीं मां, 549 दिन बाद मिला इंसाफ

Published: Fri, 16 Oct 2026 09:49 PM (IST)

रविता और अमरदीप को अमित की हत्या के मामले में मृत्युदंड की सजा सुनाई गई है। मृतक की मां मुनेश ...और पढ़ें

अमरदीप और रविता को फांसी की सजा।

अमरदीप और रविता को फांसी की सजा।

HighLights

  1. रविता और अमरदीप को अमित हत्याकांड में मृत्युदंड।

  2. मृतक की मां मुनेश देवी को 549 दिन बाद न्याय।

  3. कोर्ट ने ऐसे अपराध रोकने को कठोर दंड जरूरी बताया।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सुबह 10 बजे मुनेश जेठ के बेटे सोहनवीर के साथ कोर्ट परिसर पहुंचीं। साढ़े दस बजे रविता और अमरदीप को जेल से ऑनलाइन जोड़ा गया। रविता ने कहा कि उनके तीन छोटे बच्चे हैं और उनका ख्याल रखा जाए। इसके बाद अमरदीप ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल का हवाला देते हुए रहम की अपील की।

कोर्ट परिसर में मौजूद मुनेश ने कहा, “549 दिनों से तड़प रही हूं... मुझे इंसाफ चाहिए।” ऑनलाइन वीडियो कांफ्रेंसिंग खत्म होने के बाद मुनेश और सोहनवीर शाम तीन बजे तक फैसले का इंतजार करते रहे। सवा तीन बजे निर्णय आते ही मुनेश की आंखों से आंसू बहने लगे।

उन्होंने कहा, “बेटा भी गया, बहू भी गई, बच्चों की परवरिश खुद करेगी।” मुनेश ने कहा कि आज उन्हें, उनके बेटे और उसके बच्चों को सुख-शांति मिली है। रविता और अमरदीप को फांसी होने पर न्याय पूरा होगा।

बहसूमा थाने के गांव अकबरपुर सादात में शुक्रवार घर पर अमित के अविवाहित चाचा राजू अन्य स्वजन व ग्रामीणों के साथ प्लाट में चारपाई पर बैठे थे। तभी सूचना आई कि रविता और अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। तब राजू ने कहा कि जल्द न्याय मिल गया, जो जैसा करेगा उसका फल वैसा ही मिलेगा। मृत्युदंड से कम कोई और सजा उन्हें नहीं हो सकती थी।

ग्रामीण वहां पहुंच गए रहे थे अपना-अपना मत रख रहे थे। लोगों का कहना था मां भगवती के आशीर्वाद से जल्द ही उन्हें न्याय मिल गया। शुक्रवार को अमित के तीनों भाई मोनू, अंकित और संदीप बाहर गए हुए थे। घर पर अमित के चाचा राजू व उनके तीनों बच्चे व अन्य परिवार के लोग मौजूद थे।

बेटे की मौत के सात-आठ माह बाद ही पिता की हो गई थी मौत

बेटे अमित की मौत का पिता विजयपाल कश्यप को इतना धक्का लगा था कि उन्होंने चारपाई ही पकड़ ली थी। उनके सामने इतना कुछ हुआ कि वह उसे दिल से नहीं भुला पा रहे थे। आखिर बेटे की मौत के सात-आठ माह बाद ही वह गम सह नहीं सके और चल बसे। हालांकि वह तभी से बीमार भी पड़ गए थे। मृतक के चाचा ने बताया कि करीब 90 गज में अंमित बैठक निर्माण के लिए नींव और पिलर भरा रहा था।

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