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Meerut Medical College में 'सिस्टम' फेल: बत्ती गुल होने से 100 ऑपरेशन टले; मरीजों के साथ भटक रहे तीमारदार  

By Sanjeev Kumar Jain Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 16 Jul 2026 01:11 PM (GMT+05:30)

मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में पांच दिनों से बिजली गुल है, जिससे करीब 100 ऑपरेशन टल गए हैं।

मेडिकल कालेज में कर्मचारी के न आने पर खुद मरीज को ले जाते स्वजन, सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक के नेफ्रोलाजी विभाग में बिजली न होने पर हाथ के पंखे से काम चलातीं नर्सिंग स्टाफ। जागरण

मेडिकल कालेज में कर्मचारी के न आने पर खुद मरीज को ले जाते स्वजन, सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक के नेफ्रोलाजी विभाग में बिजली न होने पर हाथ के पंखे से काम चलातीं नर्सिंग स्टाफ। जागरण

HighLights

  1. पांच दिनों से सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में बिजली गुल।

  2. डायलिसिस और अन्य सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित।

जागरण संवाददाता, मेरठ। सरकारी सिस्टम की लापरवाही और संवेदनहीनता मरीजों की जान पर किस कदर भारी पड़ सकती है, इसका प्रमाण है लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज अस्पताल का सुपर स्पेशियलिटी ब्लाॅक। पांच दिन बाद भी ब्लाॅक की बिजली व्यवस्था दुरुस्त नहीं होने से यहां आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

विद्युत आपूर्ति ध्वस्त होने पर पहले जांच बंद की गईं फिर आपरेशन थियेटर (OT) बंद कर दिए। अब बुधवार को मरीज भी भर्ती करने बंद कर दिए। ओटी बंद होने से बुधवार तक करीब 100 पूर्व निर्धारित आपरेशन टल चुके हैं।

मरीजों को एक सप्ताह बाद की तिथि दी जा रही है। जनरेटर के सहारे सिर्फ ओपीडी चलाई जा रही है। गंभीर रोगी परामर्श लेकर लौटने को मजबूर हैं। जल्द व्यवस्था सुधरती नहीं दिख रही।

बुधवार को सिंघावली निवासी अरमान 10 महीने के बच्चे आइजल को लेकर सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक पहुंचे। पीडियाट्रिक सर्जरी की ओपीडी (OPD) में चिकित्सकों ने बच्चे की छाती में गंभीर संक्रमण बताते हुए उसे भर्ती करने की सलाह दी।

यह भी बताया कि पीडियाट्रिक सर्जरी के वार्ड में बिजली न होने के कारण उसे पुराने अस्पताल के बाल रोग विभाग के आइसीयू (ICU) में भर्ती कराना होगा। तीमारदार बच्चे को लेकर वहां पहुंचे तो बताया गया कि एक बेड पर दो-तीन बच्चे पहले से भर्ती हैं।

तीमारदार के अनुरोध पर बच्चे को भर्ती कर लिया लेकिन उसे दूसरे बच्चे के साथ बेड साझा करना पड़ा। तीन माह के कुपोषित का शिकार बच्चे को लेकर स्वजन यहां पहुंचे। परामर्श के दौरान जब तीमारदार को बेड की कमी बताई गई। लाचार स्वजन बच्चे को प्राइवेट अस्पताल चले गए।

नेफ्रोलाजी विभाग में बिना बिजली के डायलिसिस नहीं हो पा रही। यहां सुबह 15 मरीज पहुंचे थे, जिन्हें परामर्श व दवाएं देकर तीन दिन बाद आने को कहा गया। कार्डियोलाजी में जनरेटर चलाकर ईसीजी की गईं। जिस कमरे में ईसीजी मशीन लगी थी, उसमें बिजली नहीं पहुंचने के कारण मशीन दूसरे कमरे में शिफ्ट की गई।

कैथलैब सहित पांच ओटी का संचालन पांचवें दिन भी बंद रहा। सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक में कार्डियोलाजी, न्यूरोलाजी, न्यूरो सर्जरी, पीडियाट्रिक सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, नेफ्रोलाजी-यूरोलाजी में दिल की बीमारी, न्यूरो और किडनी की गंभीर समस्याओं के मरीज आते हैं। जलने और दुर्घटना के घायल भी भर्ती होते हैं।

प्रतिदिन औसतन 500 मरीजों की ओपीडी और 50-60 मरीजों की भर्ती होती है। प्रतिदिन 15-20 गंभीर सर्जरी की जाती हैं। प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता ने दावा किया कि गुरुवार को व्यवस्था सुचारु हो जाएगी। यह अलग बात है कि प्रचार्य रोजाना यही दावा कर रहे हैं कि बस कल सबकुछ ठीक हो जाएगा लेकिन, वहां के हालात देखकर हाल-फिलहाल व्यवस्था सुचारु होती दिखाई नहीं दे रही।

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