मेरठ में उल्देपुर में न्यायिक आयोग ने जताया आश्चर्य, कहा- यहां तो अवैध कॉलोनियों के साथ पूरी मार्केट बन गई
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग ने मेरठ के उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों का निरीक्षण किया। आयोग ने अवैध कॉलोनियों ...और पढ़ें

HighLights
न्यायिक आयोग ने मेरठ के उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों का निरीक्षण किया।
अवैध कॉलोनियों के साथ मार्केट देखकर आयोग ने आश्चर्य जताया।
अधिकारियों से निष्क्रियता और मिलीभगत पर तीखे सवाल पूछे।
जागरण संवाददाता, मेरठ। शास्त्रीनगर सेंट्रल मार्केट मामले की सुनवाई के दौरान उल्देपुर में बसाई गई अवैध और कच्ची कॉलोनियों की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग गुरुवार को मेरठ पहुंचा।
आयोग के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया के साथ उत्तराखंड हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश ब्रह्मसिंह वर्मा ने सर्किट हाउस में अधिकारियों से उल्देपुर क्षेत्र के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद उन्हें साथ लेकर उल्देपुर गए।
वहां तीन कॉलोनियों का उन्होंने निरीक्षण किया। इस दौरान आयोग के अध्यक्ष ने आश्चर्य जताते हुए अधिकारियों से कहा कि यहां तो कॉलोनियों के साथ कई स्थानों पर मार्केट भी बन गई! उन्होंने पूरे क्षेत्र में चिह्नित की गईं और ध्वस्त की गईं कॉलोनियों, कॉलोनियों की भूमि की श्रेणी, उसकी बिक्री को लेकर अधिकारियों से सवाल किए। जिनके जवाब देने में अधिकारी असहज दिखे।
सर्किट हाउस पहुंचकर आयोग ने सबसे पहले मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी, डीएम डॉ. वीके सिंह, मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के उपाध्यक्ष संजय मीना समेत अधिकारियों के साथ बैठक की। कमिश्नर और मेडा उपाध्यक्ष ने आयोग को बताया कि प्राधिकरण क्षेत्र के चारों जोन में कुल 1386 अवैध कॉलोनियां चिह्नित हैं।
जिनमें से 312 कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण का अधिकारियों ने दावा किया। उल्देपुर में उन्होंने 15 कॉलोनियों के विरुद्ध ध्वस्तीकरण करने व इन कालोनियों में ही 102 अवैध निर्माण को ध्वस्तीकरण का नोटिस देने की बात भी आयोग को बताया।
इसके बाद आयोग अधिकारियों के साथ उल्देपुर पहुंचा। यहां अवैध कॉलोनियों पर लगे नाम के बोर्ड हटे हुए थे। तीन कॉलोनियों पर रुककर आयोग के दोनों सदस्यों ने पूरे क्षेत्र का राजस्व मानचित्र देखा। प्राधिकरण के मास्टर प्लान में भू उपयोग और अवैध कॉलोनियों की सूची देखी। निजी कॉलोनियों के लिए सरकारी भूमि पर कब्जा किए जाने के संबंध में जानकारी ली।
आयोग अध्यक्ष ने इस दौरान अधिकारियों से अवैध कॉलोनियों के विकसित होने पर नाराजगी जताई। कहा कि अवैध कॉलोनी बनाने वालों ने भोले-भाले लोगों को बहकाकर जमीन बेच दिया। मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने बताया कि आयोग ने जो जानकारी मांगी वह उन्हें दे दी गई है।
आयोग अपनी रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट को देगा। मेडा उपाध्यक्ष संजय मीना ने बताया कि उल्लेपुर में चिन्हित अवैध कॉलोनियों का ध्वस्तीकरण हो चुका है। शीघ्र सुनवाई के बाद इन कॉलोनियों में 102 अवैध निर्माण पर भी कार्रवाई होगी।
न्यायिक आयोग की जांच के बिंदु
- जिस भूमि पर अवैध काॉलोनियां बसाई गईं वह सरकारी है अथवा निजी।
- भूमि निजी है तो इसके वास्तविक मालिक कौन हैं?
- भूमि मालिकों और उसके खरीदारों के बीच लेनदेन का माध्यम क्या रहा?
- मेडा के अधिकारी वर्षों तक निष्क्रिय क्यों रहे, उन्होंने इन अवैध कॉलोनियों के निर्माण की अनुमति क्यों दी?
- अवैध कॉलोनियां प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत एवं साठगांठ से विकसित हुई हैं तो इसके लिए कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं?
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