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मिशन ओलिंपिक के लिए मेरठ व जालंधर को अतिरिक्त मिलेंगे लगभग 150 करोड़

By Pradeep Diwedi Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Fri, 30 Oct 2026 05:30 AM (IST)

केंद्र सरकार ने खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी है, जिसके तहत मेरठ और जालंधर के खेल ...और पढ़ें

नेल्को के मवाना रोड स्थित उद्याेग में अत्याधुनिक मशीनों से आटोमेटिक तरीके से तैयार होते उत्पाद, इसी तरह की मशीनों को लगाने के लिए अब सब्सिडी मिलेगी। सौ. नेल्को

नेल्को के मवाना रोड स्थित उद्याेग में अत्याधुनिक मशीनों से आटोमेटिक तरीके से तैयार होते उत्पाद, इसी तरह की मशीनों को लगाने के लिए अब सब्सिडी मिलेगी। सौ. नेल्को

HighLights

  1. मेरठ-जालंधर को खेल उद्योग उन्नयन हेतु 150 करोड़ अतिरिक्त।

  2. आधुनिक मशीनें, रोबोटिक्स, अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन पर मिलेगी सब्सिडी।

  3. भारतीय खेल उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाना मुख्य उद्देश्य।

मेरठ। भारत के ओलिंपिक 2036 और कामनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी के संकल्प को साकार करने की दिशा में केंद्र सरकार ने खेल उद्योग के लिए खजाना खोल दिया है। स्थानीय ब्रांड को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाने का यह सही अवसर माना जा रहा है। बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट ने खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को मंजूरी दी, कुल परिव्यय 2026 से 2033-34 के लिए 1,856.67 करोड़ रुपये है। इस योजना में मेरठ और जालंधर के पुराने उद्योगों को विरासत वाले उद्योग की श्रेणी में रखकर तकनीकी उन्नयन के लिए लगभग 150 करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में अलग से मिलेंगे। अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र व निवेश सब्सिडी अलग से मिलेगी।

क्रिकेट उत्पाद कंपनी पीआर स्पोर्ट्स के प्रबंध निदेशक व खेल उत्पाद व खिलौना निर्यात प्रोत्साहन परिषद के चेयरमैन सुमनेश अग्रवाल ने कहा कि जिसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी उसके लिए अब भारत सरकार स्वयं गंभीर हुई है। यह बजट से अब उद्योगों तक आधुनिक मशीनों व प्रशिक्षित श्रमिकों की पहुंच होगी। प्रमाण पत्र लेने के लिए कंपनियां आगे आएंगी। वेटलिफ्टिंग व एथलीट उत्पाद कंपनी नेल्को के निदेशक व खेल उत्पाद व खिलौना निर्यात प्रोत्साहन परिषद के वाइस चेयरमैन अंबर आनंद ने कहा कि 130 करोड़ से 150 करोड़ रुपये तक धनराशि मेरठ व जालंधर को अतिरिक्त मिलेगी।

उद्योगों को तकनीकी उन्नयन के लिए सब्सिडी के रूप में यह धनराशि मिलेगी। मेरठ हों या जालंधर दोनों में अधिकांश उद्योग स्वयं का ब्रांड वैश्विक बनाने के बजाय दूसरे देश की कंपनियों के लिए उत्पाद बनाती हैं क्योंकि उनके पास संसाधन नहीं रहता है। टेबल टेनिस के प्रमुख निर्यातक स्टैग इंटरनेशनल के प्रबंध निदेशक राकेश कोहली ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र हासिल करना सबसे बड़ी चुनौती होती है, इसमें भारत के खेल उत्पाद पीछे हो रहे थे। अब सरकार सब्सिडी देगी जिससे ढांचा विकसित करना आसान हो जाएगा।

विश्व मंच पर 'लोकल से ग्लोबल' की छलांग
राष्ट्रमंडल खेल और ओलिंपिक खेलों की तैयारी केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया भर के एथलीटों के हाथों में भारतीय ब्रांड्स के उपकरण पहुंचाना भी इसका मुख्य उद्देश्य है। कैबिनेट के इस फैसले का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर भारतीय उत्पादों की ब्रांडिंग पर पड़ेगा। अब तक वैश्विक प्रतियोगिताओं में विदेशी कंपनियों के उपकरणों का दबदबा रहता था, लेकिन गुणवत्ता और तकनीकी सुधार के बाद मेरठ और जालंधर के बने उत्पाद सीधे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स को टक्कर देंगे। यही नहीं अब मेरठ व जालंधर की तरह खेल उद्योग में नए शहर भी अपना स्थान बनाएंगे, इसलिए अन्य शहरों में निवेश करने वालों को भी सब्सिडी मिलेगी।

मेरठ को यह मिलेगा लाभ
-पारंपरिक उद्योगों को आटोमेटिक कार्य की तरफ ले जाने के लिए आधुनिक सीएनसी मशीनें, रोबोटिक्स कटिंग और हाईटेक लैब के लिए सब्सिडी दी जाएगी।
-विश्व स्तरीय आयोजनों में उत्पाद को शामिल कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। प्रतिवर्ष इसका शुल्क एक से दो करोड़ रुपये तक है। अब अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र हासिल करने और उनके नवीनीकरण पर सरकार 70 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध कराएगी।

-नए स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए टर्नओवर-लिंक्ड सहायता और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था मिलेगी। -उत्पादों की मजबूती और सटीक माप के लिए अत्याधुनिक टेस्टिंग लैब्स व सेंटर आफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे।

इन कंपनियों के ओलिंपिक में जाते हैं उत्पाद
-स्टैग इंटरनेशनल
-भल्ला व वीनेक्स
-नेल्को
-नेशनल स्पोर्ट्स