फायरिंग रेंज के लिए आरक्षित जमीन पर भी बना दी अवैध कालोनी, मेरठ में यूं रडार पर आया मामला
मेरठ के उल्देपुर में सेना की फायरिंग रेंज के लिए आरक्षित 95 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कॉलोनियां बसा दी गई ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
उल्देपुर में सेना की आरक्षित जमीन पर अवैध कॉलोनी।
95 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण का आरोप, मेरठ मामला।
लोकेश खुराना ने न्यायिक आयोग से की थी शिकायत।
जागरण संवाददाता, मेरठ। उल्देपुर में अवैध कालोनी बसाकर करोड़ों रुपये कमाने वालों ने यहां सेना की फायरिंग रेंज के लिए आरक्षित जमीन को भी नहीं छोड़ा। अकेले उल्देपुर गांव में ही 95 हेक्टेयर जमीन ऐसी है, जिस पर कालोनियां और अन्य निर्माण कर लिए जाने का आरोप है। सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर करने वाले लोकेश खुराना ने इस मामले की शिकायत न्यायिक आयोग के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश सुधांशु धूलिया से की है।
उन्होंने ईमेल के साथ भूमि का विवरण और प्रदेश सरकार के गजट आदेश की प्रति भेजकर जांच में इस बिंदु को शामिल करने की मांग की है। सोफीपुर में सेना की फायरिंग रेंज है, जहां फायरिंग, गोला दागने और तोप चलाने का अभ्यास होता है। इसके लिए सुरक्षा के लिहाज से सोफीपुर के अलावा मामेपुर, ललसाना और उल्देपुर गांवों की सैकड़ों बीघा जमीन भी आरक्षित की गई है। नियम के तहत इस जमीन को खाली रखना जरूरी है। यह आरक्षण आदेश हर पांच वर्ष में नवीनीकृत किया जाता है।
प्रदेश सरकार ने 25 अगस्त 2025 को इस संबंध में गजट जारी किया था। आदेश के मुताबिक, जमीन 30 सितंबर 2029 तक आरक्षित है। लोकेश खुराना ने न्यायिक आयोग अध्यक्ष को ईमेल के माध्यम से इस गजट आदेश के साथ उल्देपुर के 127 गाटाओं में शामिल 95 हेक्टेयर जमीन का विवरण उपलब्ध कराकर आरोप लगाया है कि इस आरक्षित जमीन पर भी अवैध कालोनियां बसा दी गई हैं।