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पिता से बात करने की जिद पर अड़ी थी बेटी, तब ड्रम की तरफ इशारा करके पीहू से बोली मुस्कान... पापा उसमें हैं

By Jagran NewsEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Thu, 15 Oct 2026 05:30 AM (IST)

मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड मिला है। बेटी पीहू की जिद से सौरभ की ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. मुस्कान और साहिल को सौरभ हत्याकांड में मृत्युदंड।

  2. बेटी पीहू ने ड्रम में पिता होने का राज खोला।

  3. 64 दिन की जांच और 22 गवाहों से मिला न्याय।

सुशील कुमार, मेरठ। हत्या के अगले दिन दिन चार मार्च को मुस्कान और साहिल हिमाचल घूमने चले गए थे। वहां से 17 मार्च को लौटने के बाद 18 मार्च को सौरभ की हत्या का पर्दाफाश तब हुआ जब बेटी पीहू ने पापा से बात कराने की जिद की। इस पर मुस्कान टूट गई और ड्रम की तरफ इशारा करते हुए कहा था कि पापा उसमें हैं। पीहू ने यह बात अपनी नानी को बताई। जिस सौरभ के शरीर के मुस्कान ने टुकड़े किए थे, कभी वह उस पर जान छिड़कती थी।

साथ रहने की जिद में दोनों ने परिवार से बगावत भी की थी। नवंबर 2016 में नाबालिग मुस्कान रात में घर छोड़कर सौरभ के पास पहुंची तो उसकी मां ने थाने में तहरीर देकर बेटी के अपहरण का आरोप लगा दिया था। तब सौरभ उसे लेकर दिल्ली चला गया था। दस दिन बाद दोनों को पुलिस ने बरामद किया था। सौरभ की मां रेणू देवी ने बताया कि परिवार ने मुस्कान के बालिग होने का इंतजार किया।

इसके बाद दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली थी। 2019 में मुस्कान की जिंदगी में स्कूल के सहपाठी साहिल की एंट्री होती है और फिर सब बिखरता चला गया। जेल में साहिल कैदी नंबर 395 और मुस्कान कैदी नंबर 396 : अदालत से मृत्युदंड दिए जाने के बाद जिला कारागार में साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की पहचान बदल गई है।

 64 दिन तक चली थी मृत्युदंड तकहत्याकांड की जांच

अब साहिल को कैदी नंबर 395 और मुस्कान को कैदी नंबर 396 से जाना जाएगा। जल्द ही दोनों को सेंट्रल जेल भेजा जाएगा। जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि सजा सुनते ही वीडियो कांफ्रेसिंग पर ही दोनों जोर-जोर से रोने लगे थे। बोले कि उन्हें उम्मीद थी कि अदालत न्यायपूर्ण कार्रवाई करेगी। दोनों ने कहा कि वह निचली अदालत के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। 64 दिन की तफ्तीश, 22 गवाही... सबूतों ने पहुंचाया मृत्युदंड तकहत्याकांड की पुलिस की जांच 64 दिन तक चली थी।

मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, इसलिए पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी हत्या का मकसद सामने लाना और घटनास्थल से लेकर आरोपितों की यात्रा तक की हर कड़ी को साक्ष्यों से जोड़ना। तत्कालीन एसएसपी डा. विपिन ताडा ने बताया कि मेरठ से हिमाचल के मनाली-कसौल तक घटना की कड़ियां जोड़ीं गईं। कैमरों में दर्ज गतिविधियों से लेकर घटनाक्रम से जुड़े लोगों तक को जांच का हिस्सा बनाया।

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हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू और गड़ासे की खरीद से लेकर शव को छिपाने के लिए ड्रम और सीमेंट खरीदने तक की कड़ियों को विवेचना में शामिल किया गया। मां रेनू, भाई बबलू व दोस्त सौरभ की गवाही भी अहम मानी गई। चार्जशीट में 22 गवाहों को एक-एक करके उचित समय पर अदालत में पेश कराया गया।

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मुस्कान बोली, मेरी दो छोटी बेटियां हैं... रहम कीजिए साढ़े 10 बजे जिला कारागार से मुस्कान और साहिल को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। मुस्कान बेटी को गोद में लिए थी। डीजीसी केके चौबे के मुताबिक सफाई में कुछ कहने के सवाल पर मुस्कान ने कहा कि उसकी दो छोटी बेटियां हैं और उन्हें ध्यान में रखकर न्याय किया जाना चाहिए। साहिल से भी पूछा गया लेकिन वह गुमसुम रहा।