मेरठ, जेएनएन। जिले में दो-दो वैक्सीन लगाई जा रही है। सीरो सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि एनसीआर में 50 फीसद से ज्यादा लोगों में एंटीबाडी बन गई है, वहीं टीकाकरण के पांच चरण के बाद हर्ड इम्युनिटी बनने लगी है। डाक्टरों का कहना है कि 15 प्रतिशत आबादी का भी टीकाकरण हुआ तो वायरस को संक्रमण की नई राह नहीं मिलेगी। नए मरीज नहीं मिलेंगे।

मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलोजिस्ट डा. अमित गर्ग का कहना है कि टीका लगने के साथ ही वायरस के एंटीजन को शरीर पहचानने लगती है। 15-20 दिनों में आंशिका प्रतिरक्षा प्रणाली विकसित हो जाती है। शोधों में पता चला कि पहली डोज लेने के 28 दिन बाद लोगों में 60 फीसद एंटीबाडी बन जाती है। दूसरी डोज के 12 दिन बाद यानी कुल 42 दिन में पूरी तरह एंटीबाडी टाइटर बन जाते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि पहला डोज लेने के दो सप्ताह के दौरान व्यक्ति वायरस की कड़ी तोड़ने लगता है। हर वैक्सीन इसी सिद्धांत पर काम करती है।

दसवें दिन से मिलने लगती है सुरक्षा

मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डा. अशोक तालियान कहते हैं कि हर वैक्सीन लगने के दसवें दिन से आंशिक सुरक्षा देने लगती है। यह हर्ड इम्युनिटी का कारण बनता है। बाल रोग विशेषज्ञ डा. नीरज कांबोज का कहना है कि देश हर्ड इम्युनिटी के करीब खड़ा है। टीका लगने के साथ ही यह स्थिति तेजी पकड़ेगी। सीएमओ डा. अखिलेश मोहन का कहना है कि कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक ही गंभीर रोग नहीं बनने देगी, लेकिन दोनों से 90 फीसद सुरक्षा मिल जाएगी। हालांकि इनको भी कोरोना हो सकता है, सिर्फ उसका घातक असर नहीं होगा। आगाह किया कि ऐसे लोग दूसरों को कोरोना फैला सकते हैं। बच्चों को कोरोना होता तो है, लेकिन उनमें कोई लक्षण नहीं उभरता। इस वजह से वो संक्रमण की बड़ी वजह बन सकते हैं। लेकिन चिकित्सकों का कहना है कि हर्ड इम्युनिटी बनने से वायरस उनमें संक्रमित नहीं हो पाएगा। 

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