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मेरठ में वायु प्रदूषण का कहर, पल्लवपुरम और जय भीम नगर में हवा 'बेहद खराब' श्रेणी में

By Om Bajpai Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Mon, 02 Nov 2026 06:16 PM (IST)

Meerut News: मेरठ में दीपावली से पहले वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच गया है, खासकर पल्लवपुरम और जयभीम नगर ...और पढ़ें

मेरठ में माल रोड पर छाई धुंध। जागरण

मेरठ में माल रोड पर छाई धुंध। जागरण

HighLights

  1. दोनों इलाकों में सुबह नौ बजे से दोपहर एक बजे तक एक्यूआइ 325 के आसपास बना रहा।

  2.  शहर में सुबह के समय छायी रही धुंध, धूल, गैसों से PM 2.5 बढ़ा, GRAP नियमों की अनदेखी।

जागरण संवाददाता, मेरठ। दीपावली के पहले वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो गई है। दीपावली तक इसमें कोई सुधार की संभावना नहीं है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा शाम चार बजे जारी सूची में दिल्ली में एक्यूआइ 324 रिकार्ड किया गया। यह बेहद खराब (Very poor) वायु की गुणवत्ता को दर्शाता है।

मेरठ में यह 234 रहा। लेकिन कई स्थानों में वायु की गुणवत्ता सांस लेने योग्य नहीं थी। धूल और प्रदूषित गैसों का जमाव निचले वातावरण में बढ़ने से सुबह के समय धुंध छायी रही। पल्लवपुरम और जयभीम नगर में पीएम 2.5 की मात्रा बढ़ने से वायु की गुणवत्ता स्थिति रेड श्रेणी में रही। सर्किट हाउस, आरटीओ रोड, टीपी नगर जैसे इलाकों में बुरा हाल रहा। दोपहर एक बजे तक लगातार 24 घंटे तक हवा मानव स्वास्थ्य के लिए खराब बनी रही।

पल्लवपुरम में सुबह 10 बजे से दोपहर एक बजे एक्यूआइ 325 के आसपास बना रहा। जयभीम नगर मेंं भी यही स्थिति रही। गंगानगर और दिल्ली देहरादून बाइपास पर स्थिति में थोड़ा सुधार दिखा यहां पर वायु गुणवत्ता सूचकांक 250 के आसपास रहा।

वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे मौसम महत्वपूर्ण कारक है। सर्दी में हर साल खराब होने वाली वायु गुणवत्ता को देखते हुए केंद्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग का गठन किया गया है। आयोग समय समय पर गाइडलाइन जारी करता है। जिससे प्रदूषण पर लगाम लग सके लेकिन क्रियान्वयन करने वाली एजेंसियाें के उदासीन रवैए से स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाता। एक बार फिर मौसम में बदलाव आया है और दिल्ली में वायु की गुणवत्ता बेहद खराब की स्थिति में सोमवार को पहुंच गई।

जनपद के पल्लवपुरम जयभीम नगर मेंं दोपहर को पीएम 2.5 की मात्रा 372 तक पहुंच गई। नाइट्रोजन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड जैसी गैसें जो वाहनों और फैक्ट्रियों के धुएं से निकलती हैं इनका घनत्व भी बढ़ा हुआ है। जयभीमनगर में कार्बन मोनो आक्साइड जैसी विषाक्त गैस का स्तर लगातार 12 घंटे तक 100 से अधिक रहा।

धूल के गुबार से निकलना हुआ मुश्किल

सर्किट हाउस से लेकर सीएमओ कार्यालय तक सड़क पर जाने के लिए लोगों को धूल के गुबार के बीच से गुजरना पड़ रहा है। शहर आला पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के इस रोड पर या इसके आसपास कार्यालय हैं। सुशीला जसवंत राय जैसा बड़ा अस्पताल और लेकिन इसके बावजूद ग्रेप के नियमों के अनुपालन कराने की फिक्र किसी को नहीं है। सड़क के दोनों ओर मिट्टी के ढ़ेर लगे हैं।

लगातार धूल उड़ने से आसपास के लोगों का रहना दूभर हो गया है। सोमवार को यहां पर सुबह के समय पानी का छिड़काव किया गया लेकिन कुछ ही देर में फिर से धूल उड़ने लगी। ग्रेप वन के तहत दिन में कम से कम तीन ऐसी सड़कों पर पानी का छिड़़काव जरूरी है।

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