राजनारायण कौशिक, बिजनौर। कुशल राजनीतिज्ञ एवं मुस्लिम-दलित गठजोड़ तैयार करने में माहिर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपना सियासत की शुरूआत बिजनौर से की थी। आज 15 जनवरी को उनका जन्‍मदिवस है। 1984 में हुए उपचुनाव में दो दिग्गजों के बीच चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहते हुए मायावती एक शख्सियत के रूप में उभर कर सामने आई। वर्ष 1991 में बिजनौर सीट से सांसद चुनी गई। बिजनौर कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद गिरधर लाल के निधन के बाद 1985 में बिजनौर संसदीय सीट पर रिक्त हुई थी।

निर्दलीय के रूप में रजिस्टर

यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट होने वजह से उपचुनाव में कांग्रेस ने दलित नेत बाबू जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार को टिकट दिया, जबकि लोक क्रांति दल (एलकेडी) से रामविलास पासवान चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में मायावती ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। हालांकि मायावती उस समय तक बहुजन समाज पार्टी की सदस्य थीं, किंतु उस वक्त निर्वाचन आयोग ने उन्हें निर्दलीय के रूप में रजिस्टर किया। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के बाद पूरे देश में कांग्रेस के प्रति सहानुभूति की लहर थी, किंतु उस वक्त मायावती की लोकप्रियता बढ़ती देख कांग्रेस मुश्किल में घिर गई थी।

ऐसा रहा था परिणाम

इस हाई प्रोफाइल उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में यूपी के तत्कालीन सीएम वीर बहादुर सिंह थे, जबकि रामविलास पासवान के समर्थन में सपा सप्रीमो मुलायम सिंह यादव, शरद यादव सरीखे कई दिग्गज बिजनौर में डेरा डाले रहे थे। इस उपचुनाव में हुए कांटे के मुकाबले में मीरा कुमार को 5,346 वोट से जीत मिली थी। इस चुनाव में मीरा कुमार 1,28,101 मत और रामविलास पासवान को 1,22,755 वोट मिले थे। वहीं तीसरे स्थान पर रही मायावती ने 61,506 मत हासिल किए थे।

सांसद निर्वाचित

इस उपचुनाव में लोगों ने पहली बार माना था, कि मायावती भी एक शख्सियत हैं। वर्ष 1989 में हुए लोकसभा चुनाव में मायावती पहली बार बिजनौर सीट से सांसद निर्वाचित हुई। इस चुनाव में मायावती ने जनता दल के मंगलराम प्रेमी को पराजित किया था। इस चुनाव में कांग्रेस से चुनाव लड़ीं पूर्व सांसद गिरधारी लाल की पुत्री आशा चौधरी दूसरे नंबर पर रहीं थी। वर्ष 1995 में मायावती ने यूपी की पहली महिला दलित मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।

Edited By: Prem Dutt Bhatt