मेरठ, जागरण संवाददाता। Maulana Kaleem News मौलाना कलीम सिद्दीकी के मतांतरण में मद्दगार बने दस लोग एटीएस के निशाने पर आ गए हैं। सर्विलांस के जरिये सभी की जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि सभी ने अपने मोबाइल फिलहाल बंद कर दिए हैं। लेकिन इन सबके बीच एटीएस ने अपनी जांच को और तेज कर लिया है।

हवाला के जरिये फंडिंग

मुजफ्फरनगर के फुलत गांव निवासी मौलाना कलीम सिद्दीकी मतातंरण के लिए देशव्यापी सिंडिकेट चलाकर हवाला के जरिये फंडिंग करते थे। एटीएस ने दावा किया कि शरीयत के अनुसार व्यवस्था लागू कर जनसंख्या अनुपात बदलने के लिए वृहद स्तर पर मतांतरण कराते थे। मौलाना कलीम सिद्दीकी के बारे में रोजाना अलग अलग तथ्य एटीएस के सामने आ रहे हैं। एटीएस ने मतांतरण में मौलाना कलीम सिद्दीकी के साथ अहम भूमिका निभाने वाले दस लोगों को टार्गेट किया है।

वीडियो भी एटीएस ने जुटाई

फिलहाल सभी का मोबाइल बंद हैं, जो अपने घर से भी फरार हो चुके हैं। पुलिस की इंटेलीजेंस इनकी टोह ले रही है। देखा यह भी जा रहा है कि मौलाना कलीम सिद्दीकी मेरठ के किस-किस के पास आते थे। गिरफ्तारी के समय भी मेरठ में ही माशा अल्लाह मस्जिद में आए हुए थे। उससे भी अहम बात है कि मौलाना की गिरफ्तारी के बाद लिसाड़ीगेट थाने का घेराव करने वाले लोगों की वीडियो भी एटीएस ने जुटा ली है।

उस्मान के साथ भी ढूंढा जा रहा मौलाना का कनेक्शन

खरखौदा के उस्मान ने भी जेल में रहते हुए मुंडाली के मऊखास निवासी ताराचंद को मतांतरण कराकर ताहिर बना दिया था। जेल से बाहर आने के बाद ताराचंद ही अन्य लोगों पर मतांतरण का दबाव बनाने लगा था। यानि जेल के अंदर भी मतांतरण का काम चल रहा है। अपराधियों को जेल से छुटवाने का सौदाकर मतांतरण कराया जा रहा था। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी मुंडाली पुलिस अभी तक जेल में बंद उस्मान के खिलाफ कोई कठौर कार्रवाई नहीं कर पाई है। ऐसे में एटीएस इस प्रकरण को भी खंगाल रही है। पड़ताल की जा रही है कि कहीं जेल में बंद उस्मान का मालौना से कनेक्शन तो नहीं है, जो जेल में रहते हुए मतांतरण का काम कर रहा है। मतांतरण कराने के बाद उक्त लोगों को दूसरे साथियों को भी मतांतरण कराने का जिम्मा सौंपा जाता है। एटीएस ने इस पूरे मामले की पुलिस से जानकारी जुटा ली है।

इनका कहना है

मौलाना कलीम सिद्दीकी से जुड़े प्रत्येक शख्स की निगरानी की जा रही है। कलीम सिद्दकी से जुड़े कुछ लोगों के नाम सामने आए है। उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

- प्रशांत कुमार, एडीजी कानून व्यवस्था

Edited By: Prem Dutt Bhatt