मेरठ, जेएनएन। अयोध्या की धरती जैन समाज के पांच तीर्थकरों की जन्मस्थली है। अयोध्या में ऋषभ नाथ की 31 फुट ऊंची मूर्ति है। इस क्षेत्र को सात एकड़ भूमि पर नए सिरे से विकसित करने की योजना बनाई गई है। इसमें भव्य मंदिर के साथ भक्तों के रहने व ठहरने की व्यवस्था, जैन समाज के लिए शाकाहार भोजन की रसोई जैसी सुविधाएं प्रदान की जानी हैं। बुधवार को यह बात दिगंबर जैन अयोध्या तीर्थ क्षेत्र कमेटी के पीठाधीश्वर रवींद्र कीर्ति स्वामी ने कही। वे सुनील जैन के थापर नगर स्थित आवास पर पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।

रवींद्र कीर्ति स्वामी ने कहा कि भव्य जैन मंदिर बनाने का कार्य गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता जी की प्रेरणा से हो रहा है। माता जी 500 ग्रंथों का लेखन कर चुकी हैं। पिछले दिनों उन्होंने राष्ट्रपति भवन में प्रवचन किया था। दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समस्त जैन समाज की ओर से उन्हें मदर आफ दी नेशन की उपाधि से सम्मानित किया है। बताया कि माता ज्ञानमती की प्रेरणा से 11 दिगंबर जैन मंदिरों का जीर्णोद्धार और विकास किया गया। स्वामी रवींद्र कीर्ति ने कहा कि अयोध्या शाश्वत तीर्थ रहा है। भगवान आदिनाथ, अजितनाथ, अभिनंदननाथ, सुमतिनाथ और अनंतनाथ का जन्म अयोध्या में हुआ था। इन तीर्थकरों की चरण पादुकाएं आज भी अयोध्या में विराजमान हैं। उन्होंने कहा कि जनवरी से अयोध्या में जीर्णोद्धार का कार्य आरंभ किया जाएगा। सुनील जैन सर्राफ, अंकुर जैन, रिशु जैन, संजय जैन, दिनेश चंद जैन, मनोज जैन, राकेश जैन, सुनील जैन प्रवक्ता, डा. जीवन प्रकाश जैन आदि मौजूद रहे।

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