भारत में बनेगा रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट, कच्चा माल उपलब्ध कराएगा मेरठ; औद्योगिक क्षेत्र में लगेगी रिफाइनरी
भारत अब रक्षा उपकरणों और इलेक्ट्रिक वाहनों में उपयोग होने वाले रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) का देश में ही उत्पादन करेगा।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
भारत 6000 मीट्रिक टन आरईपीएम उत्पादन का लक्ष्य।
मेरठ 30% एनडीपीआर ऑक्साइड उपलब्ध कराएगा।
सईम रिजवी की कंपनी करेगी 200 करोड़ का निवेश।
प्रदीप द्विवेदी, मेरठ। रक्षा उपकरणों, हवाई सेवा, इलेक्ट्रिक वाहनों आदि में उपयोग आने वाला रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) यानी स्थायी चुंबक अब देश में भी बनेगा। इसके निर्माण में प्रयोग होने वाला प्रमुख कच्चा माल एनडीपीआर आक्साइड मेरठ में भी बनेगा।
भारत सरकार ने 6000 मीट्रिक टन आरईपीएम बनाने का लक्ष्य रखा है, इसके लिए 30 प्रतिशत एनडीपीआर मेरठ उपलब्ध कराएगा। गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित किए जा रहे औद्योगिक क्षेत्र में शहर निवासी सईम रिजवी रेयर अर्थ रिफाइनरी स्थापित करने जा रहे हैं।
इसके लिए प्रदेश सरकार के साथ 200 करोड़ रुपये का निवेश करने के लिए एमओयू किया है। सरकार जल्द ही उनकी कंपनी सर्कुलाजी क्लींटेक प्राइवेट लिमिटेड को 20 हजार वर्ग मीटर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। यह कंपनी हर साल एक हजार मीट्रिक टन रेयर अर्थ और 10 हजार मीट्रिक टन क्रिटिकल मिनरल का उत्पादन करेगी।
वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव-अस्थिरता के बीच भू-राजनीतिक (जिओ पालिटिक्स) की रणनीति लगातार बदल रही है। उन्नत तकनीक में आत्मनिर्भर बनने की होड़ है लेकिन देशों के पास उसमें उपयोग आने वाला प्रमुख तत्व रेयर अर्थ उपलब्ध नहीं है।
चीन से सबसे अधिक आयात
भारत को आरईपीएम का आयात करना पड़ता है, जिसमें से सबसे अधिक हिस्सा चीन से आता है। भारत ने 2024-25 में 53 हजार मीट्रिक टन रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) का आयात किया जोकि रेयर अर्थ से बनता है। इस पर चीन का दबदबा होने के कारण अधिकांश आयात चीन से होता है।
अब भारत ने आरईपीएम में आत्मनिर्भर बनने के लिए देश में ही 6000 हजार मीट्रिक टन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा है। इतना आरईपीएम बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कच्चा माल में 2000 हजार मीट्रिक टन एनडीपीआर आक्साइड यानी नियोडिमियम व प्रैजियोडाइमियम चाहिए। एनडीपीआर की इस आवश्यकता का 30 प्रतिशत हिस्सा मेरठ उपलब्ध कराएगा।
ई-वेस्ट के व्यवसाय से रेयर अर्थ के अनुसंधान-उत्पादन तक पहुंचे
गगसोना गांव निवासी सईम ने मवाना के एएस इंटर कालेज से 12वीं करने के बाद परिवार की जिम्मेदारी निभाने के लिए अलीपुर जिजमाना में ई-वेस्ट का व्यवसाय शुरू किया। व्यवसाय करते हुए उन्हें इसके तत्वों को समझने की जिज्ञासा होने लगी। उन्होंने पढ़ना शुरू किया। काफी जानकारी होने के बाद उन्होंने यह कार्य बंद कर दिया।
कमाई से खरीदे प्लाट बेचकर कंपनी पंजीकृत कराई। भारत सरकार के खान मंत्रालय के सहयोग से जमशेदपुर में रिसर्च लैब खोली। उसमें सफलता मिलने के बाद उत्पादन का पायलट प्रोजेक्ट वहीं शुरू किया। व्यावसायिक रूप से उत्पादन के लिए प्रदेश सरकार के इन्वेस्ट यूपी के साथ एमओयू किया है।
लीथियम बैट्री, टर्बाइन, एमआरआई मशीनों से निकालेंगे तत्व
कंपनी ई-वेस्ट यानी इस्तेमाल हो चुकी लिथियम-आयन बैटरियों से लिथियम, कोबाल्ट और निकेल जैसे महत्वपूर्ण खनिज निकालेगी। यही नहीं एमआरआई मशीनों, टर्माइन, हार्ड ड्राइव और इलेक्ट्रिक वाहनों की मोटरों में इस्तेमाल होने वाले पुराने आरईपीएम यानी स्थायी चुंबकों से नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टर्बियम जैसे रेयर अर्थ तत्व निकाले जाएंगे।
