मेरठ, जेएनएन। शहर में हुए तेल के खेल में अभी कई सवालों के जवाब आने बाकी हैं। तेल डिपो मालिक संजय कुमार के कुंडा गांव स्थित केरोसिन डिपो में 48 घंटे में ऐसा क्या हो गया कि प्रशासन भी अचंभित रह गया। प्रशासन ने तीन टीम गठित करके पांच सितंबर को छापामारी कराई थी। उस दिन संजय के केरोसिन डिपो पर भी छापामारी हुई थी। प्रशासन की ओर से जारी हुई पांच डिपो की रिपोर्ट में बताया गया कि 'औचक जांच में थोक विक्रेताओं का केरोसिन स्टॉक सही एवं राशन डीलरों को वितरण नियमानुसार होना पाया गया।

पहले ठीक से नहीं हुई जांच
इस टीम का नेतृत्व एसडीएम प्रशिक्षु व तहसीलदार न्यायिक ने किया था, जिसमें पूर्ति विभाग के भी अधिकारी-कर्मचारी थे। सात सितंबर को संजय के डिपो पर छापामारी फिर कराई जाती है और 71 हजार 888 लीटर केरोसिन अधिक मिलता है। यानी, अवैध रूप से केरोसिन जमा किया गया था। इसका मतलब साफ है कि या तो पहले की जांच ठीक से नहीं हुई अथवा जानबूझकर नजरंदाज किया गया। तेल की मात्रा मापने की तकनीकी जानकारी पूर्ति विभाग के अधिकारियों को होती है, इसलिए हो सकता है कि एसडीएम व तहसीलदार को गुमराह किया गया हो।

डिपो मालिक कैसे लगी भनक
कयास यह भी लग रहे हैं कि इस जांच टीम के गठित होने से पहले ही डिपो मालिक को भनक लग गई और उसने टीम के जाने के बाद टैंक में स्टॉक कर दिया। किसी ने यह सूचना प्रशासन तक पहुंचा दी। एक बात इसमें यह भी सामने आई है कि सात सितंबर को प्रशासन ने जो छापामारी की, उसकी पूरी योजना पूर्ति विभाग से गोपनीय रखी गई। टीम में शामिल पूर्ति विभाग के अधिकारियों को पता ही नहीं था कि टीम कहां जा रही है। उन्हें तब पता चला जब गाड़ी डिपो पर रोकी गई।

इन सवालों का कौन देगा जवाब
दो दिन पहले हुई जांच क्या ठीक से नहीं की गई?
जांच टीम की अगुआई एसडीएम प्रशिक्षु ने की थी, उन्हें पूर्ति विभाग ने गुमराह तो नहीं किया?
तेल डिपो की ओके रिपोर्ट बनने के बाद तो तेल नहीं भरा गया?
संजय कुमार के डिपो में गड़बड़ी की शिकायत प्रशासन को मिली, पूर्ति विभाग को क्यों नहीं?
क्या शिकायतकर्ता को पूर्ति विभाग पर भरोसा नहीं था?
पूर्ति विभाग को ऐसे धंधे मालूम क्यों नहीं चलते?
पेट्रोल मिलावट का मामला पुलिस ने पकड़ा और केरोसिन का प्रशासन ने, तो फिर पूर्ति विभाग क्या करता है?
केरोसिन टैंक की होने थी खोदाई, दूसरे दिन भी नहीं पहुंची टीम
संबंधित विभाग एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

नोटिस जारी, तेल आपूर्ति रोकी गई
मेसर्स रतिराम खूबचंद डिस्ट्रीब्यूटर को इंडियन ऑयल की ओर से सोमवार को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। इसमें पूछा गया है कि कोटा से अधिक केरोसिन कहां से और कैसे आया। इस तेल को यहां क्यों रखा गया। टीम द्वारा पकड़े गए 71 हजार 888 लीटर केरोसिन के बारे में डिस्ट्रीब्यूटर का पक्ष जानने समेत कई अन्य प्रश्नों का जवाब मांगा गया है। 10 दिन में जवाब न मिलने या उचित जवाब न देने पर कंपनी का लाइसेंस रद करने की बात कही गई है। उधर, इस डिपो को इंडियन ऑयल की ओर से अग्रिम आदेशों तक केरोसिन ऑयल देने पर रोक लगा दी है। कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर मोहित कुमार का कहना है कि डिस्ट्रीब्यूटर को कारण बताओ नोटिस देने के साथ ही तेल की आपूर्ति रोक दी गई है।

कोटेदारों को तेल लेने से मना किया
कुंडा गांव स्थित मेसर्स रतिराम खूबचंद डिस्ट्रीब्यूटर से अब कोई भी राशन डीलर केरोसिन लेने नहीं जाएगा। उस डिपो से तेल लेने पर रोक लगा दी गई है। एक-दो दिन में डीलरों को दूसरे डिपो से संबद्ध कर दिया जाएगा। क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी किशोर कुमार ने बताया कि राशन डीलरों को निर्देश दे दिए हैं। इस डिपो से मेरठ शहर, सरधना व मवाना के राशन डीलर मिट्टी का तेल लेकर जाते थे।

वक्फ की जमीन कब्जाने का आरोप
सेव इंडिया जन फाउंडेशन के पदाधिकारियों का आरोप है कि मेसर्स रतिराम खूबचंद फर्म का एक पेट्रोल पंप साकेत में है। यह पेट्रोल पंप वक्फ की जमीन पर कब्जा करके बनाया गया है। फाउंडेशन की ओर से मुख्यमंत्री को शिकायत पत्र भेजा गया है। पत्र पर संस्था की अध्यक्ष भावना शर्मा, महानगर संयोजक चौधरी नितिन बालियान, रविंद्र मलिक, जयराज सिंह, यशोदा यादव व दीपक सिरोही ने हस्ताक्षर किए।

मुख्यमंत्री को भेजी डीएसओ की शिकायत
सर्वहारा समाज कल्याण समिति की ओर से मुख्यमंत्री को जिला पूर्ति अधिकारी विकास गौतम के खिलाफ शिकायत मुख्यमंत्री को भेजी गई है। समिति अध्यक्ष संदीप तितौरिया का आरोप है कि पिछले छह माह से राशन कार्ड पर मिट्टी के तेल का वितरण नहीं किया जा रहा है। जिला पूर्ति अधिकारी की शह पर राशन डीलर व डिपो संचालक कालाबाजारी कर रहे हैं। उन्होंने इसकी शिकायत अगस्त में भी की थी, तब भी उनके पत्र का संज्ञान नहीं लिया गया।

आज तलब किए आइओसीएल अफसर
छापा मारकर जब्त किये गये 70 हजार लीटर मिट्टी के तेल के अवैध स्टॉक की जांच करने इंडियन ऑयल कारपोरेशन लि. के अधिकारी तीसरे दिन भी मेरठ नहीं पहुंचे। इससे नाराज एडीएम सिटी ने कंपनी अधिकारियों को मंगलवार को तलब किया है। एडीएम का कहना है कि अब कंपनी अफसरों से लिखित में बात की जाएगी। तेल डिपो की अनियमितताओं की रोकथाम के लिए उनकी जिम्मेदारियों तथा अवैध स्टॉक पकड़े जाने के बाद जांच में सहयोग के लिए उनके दायित्व भी उन्हीं से लिखित में पूछे जाएंगे।

अपने अपने तर्क
एडीएम सिटी अजय तिवारी ने बताया कि अवैध स्टॉक पकड़े जाने के बाद प्रत्येक विभाग अपने अपने तर्क दे रहा है। लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है। मिट्टी के तेल के डिपो के स्टॉक की निगरानी की जिम्मेदारी किसकी है? तेल कंपनी अधिकारियों की ड्यूटी क्या है? इनके साथ साथ अन्य तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए मंगलवार (आज) को आइओसीएल कंपनी के अफसरों को तलब किया गया है। उनके जवाब में से ही आगे की कार्रवाई का रास्ता निकलेगा।

इनका कहना है
|केरोसिन के गोदाम में 71, 888 लीटर केरोसिन का अवैध स्टॉक मिला था। पूर्ति विभाग की और से मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस कार्रवाई करेगी। विवेचना में धाराएं घटाई-बढ़ाई जा सकती हैं। साक्ष्य जुटाने के बाद आरोपित को गिरफ्तार भी किया जाएगा।
- अजय साहनी, एसएसपी 

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