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इच्छा मृत्यु मामला: LLRM मेडिकल काॅलेज की रिपोर्ट रही महत्वपूर्ण, चार डाक्टरों की टीम ने किया था हरीश का परीक्षण

By Dileep Patel Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Sat, 14 Mar 2026 01:27 PM (IST)

Harish Rana Euthanasia: हरीश राणा के इच्छा मृत्यु मामले में लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज मेरठ के मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट महत्वपूर्ण रही।

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HighLights

  1. सीएमओ गाजियाबाद के अनुरोध पर टीम ने की थी जांच।

  2. 13 साल से जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हरीश।

जागरण संवाददाता, मेरठ। 13 साल से क्वाड्रिप्लेजिया (100 प्रतिशत दिव्यांगता) में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हरीश राणा की जांच के बाद लाला लाजपत राय मेडिकल (एलएलआरएम) कालेज के चार चिकित्सकों के मेडिकल बोर्ड ने भी रिपोर्ट दी थी कि स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद शून्य है। इच्छा मृत्यु देने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय में इस रिपोर्ट की भूमिका भी अहम रही है।

लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता ने बताया कि सीएमओ गाजियाबाद डा. अखिलेश मोहन के अनुरोध पर गाजियाबाद निवासी हरीश राणा की मेडिकल कंडीशन को लेकर रिपोर्ट देने के लिए न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डा. अखिल प्रकाश की अध्यक्षता में न्यूरोलाजिस्ट डा. सचिन गर्ग, प्लास्टिक सर्जन डा. अमित श्रीवास्तव और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डा. अंकित कुमार की टीम गठित की गई थी।

टीम ने गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित घर पहुंचकर करीब एक घंटे तक हरीश राणा के स्वास्थ्य की स्थिति जांची थी। जांच के दौरान मरीज के भाई आशीष राणा और बहन भावना राणा भी मौजूद थे। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि हरीश राणा को 13 साल पहले चोटें आई थीं। तब से उसका पीजीआई चंडीगढ़ सहित कई अस्पतालों में उपचार हो चुका है। बिस्तर पर मरीज वेजिटेटिव स्टेट, यानी अचेतन अवस्था में है।

वह सांस लेने के लिए ट्रेकियोस्टामी ट्यूब और भोजन के लिए गैस्ट्रोस्टामी पर निर्भर है। मरीज की आंखें स्वतः खुल रही हैं और ब्रेनस्टेम कार्य कर रहा है, लेकिन अंगों की प्रतिक्रियाएं सुस्त हैं। मरीज अत्यधिक दुबला-पतला हो गया है। शरीर के अंगों कोहनी, घुटने, टखने और उंगलियों में जकड़न और ऐंठन देखी गई है। कोई मूवमेंट नहीं है।

मरीज को दैनिक क्रियाओं, फिजियोथेरेपी और ट्रेकियोस्टामी देखभाल के लिए बाहरी सहारे की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए उसके स्वास्थ्य में सुधार की गुंजाइश नगण्य है। पिछले साल दिसंबर में यह रिपोर्ट दी गई थी।

लाला लाजपत राय मेडिकल कालेज के प्राइमरी मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के बाद एम्स दिल्ली ने आगे की जांच की थी। प्राइमरी बोर्ड में शामिल न्यूरोसर्जन डा. अखिल प्रकाश ने कहा कि हरीश 13 साल पहले चौथी मंजिल से गिर गए थे। वह अचेतन अवस्था में बिस्तर पर है। यह अवस्था ऐसी होती है कि आंख खुल रही है, लेकिन शरीर पर कोई नियंत्रण नहीं होता है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने निष्क्रिय इच्छा मृत्यु की अनुमति दी है। जिसमें प्राइमरी मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का उल्लेख किया है। सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय इस तरह के केसों के लिए एक नजीर बन सकता है।

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