मेरठ, जेएनएन। उप्र की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में कक्षा से दूर रहने वाले प्रोफेसरों को आड़े हाथों लिया। इशारों में ही साफ कर दिया कि अगर प्रोफेसर हैं तो पढ़ाना पड़ेगा। चौधरी चरण सिंह विवि के 31वें दीक्षा समारोह में राज्यपाल ने 54 मेधावियों को मेडल बांटे।

सामाजिक बदलाव का लें संकल्‍प

विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रेक्षागृह में आयोजित दीक्षा समारोह में राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में दीक्षा समारोह में दीक्षा प्रवचन तो होता है। उन्होंने इसे सोशल चेंज से जोड़ा है। छात्र और शिक्षक संकल्प लेकर जाएं कि वह सामाजिक बदलाव लाएंगे। प्रदेश के एक विश्वविद्यालय के कुलपति दो दिन पहले राजभवन में मिलने आए थे। कुलपति इस बात से निराश थे कि बड़े-बड़े प्रोफेसर कक्षा में नहीं जाते। अगर प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों में ऐसा है तो यह देश के लिए अच्छा नहीं है।

गुजरात के शिक्षक स्‍ट्राइक पर नहीं जाते

राज्यपाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति आने वाली है। उसमें इस तरह की समस्या के समाधान के लिए भी सुझाव रखे जाएंगे। आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वह गुजरात में जब शिक्षामंत्री थीं तो उन्होंने पढ़ाना छोड़कर स्ट्राइक पर गए शिक्षकों के लिए नो वर्क नो पे किया था। 2001 से गुजरात में अब शिक्षक स्ट्राइक पर नहीं जाते हैं। भारत में 65 फीसद आबादी युवा है। जिस तरह से आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विश्व में छा गए हैं। दीक्षा समारोह में ज्यादातर मेडल पर छात्राओं का कब्जा रहा, जिस पर राज्यपाल ने कहा लड़कियों का आगे बढ़ना गौरव की बात है, लेकिन लड़कों का पिछड़ना चिंता की बात है। उन्होंने छात्रों से कहा कि वह पढ़ाई को गंभीरता से लें।

राज्यपाल ने इन्हें दिया स्वर्ण पदक

पूजा -(मवाना, मेरठ)- एमफिल केमिस्ट्री - पूर्व राष्ट्रपति शंकरदयाल शर्मा स्वर्ण पदक

दिव्या तेवतिया- (बुलंदशहर)- एमकाम -कुलाधिपति रजत पदक

शिवा चौधरी - (सहारनपुर)- बीएससी कृषि में टॉपर, चौधरी चरण सिंह स्मृति पुरस्कार

शिवानी अहलावत - (दौराला, मेरठ)- बीएससी कृषि में द्वितीय टॉपर, चौधरी चरण सिंह स्मृति पुरस्कार 

Posted By: Prem Bhatt

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