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सम्राट अशोक ने दिया था संरक्षण का पहला आदेश, आज हस्तिनापुर वन्य जीव विहार की सौंदर्यता निखार रही गांगेय डॉल्फिन

Published: Fri, 11 Sep 2026 05:09 PM (GMT+05:30)

उत्तर प्रदेश की गंगा नदी में गांगेय डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि हुई है, जो नदी के स्वच्छ जल का ...और पढ़ें

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HighLights

  1. गांगेय डॉल्फिन स्वच्छ गंगा जल का सजीव प्रमाण हैं।

  2. उत्तर प्रदेश में देश की सर्वाधिक डॉल्फिन संख्या दर्ज की गई।

  3. सम्राट अशोक ने डॉल्फिन संरक्षण का पहला आदेश दिया था।

सचिन गोयल‚ मेरठ। गंगा केवल आस्था की संवाहक ही नहीं, बल्कि जैव विविधता की समृद्ध धरोहर भी है। हस्तिनापुर वन्य जीव विहार में जब गंगा की निर्मल धारा के बीचों-बीच राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन छलांग लगाती है, तो पूरे सेंचुरी क्षेत्र की सौंदर्यता निखर उठती है। डॉल्फिन का किसी नदी में पाया जाना उसके जल के स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त होने का सजीव प्रमाण है।

हस्तिनापुर सेंचुरी में गंगा की लहरों पर कूदती डॉल्फिन, किनारे पर धूप सेंकते घड़ियाल, दुर्लभ प्रजातियों के कछुए और तैरती मछलियां इस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र में एक नया जीवन दे रही हैं। बिजनौर बैराज से नरौरा बैराज के मध्य का गंगा क्षेत्र इन संकटग्रस्त जलीय जीवों के लिए सबसे सुरक्षित और अनुकूल प्राकृतिक वासस्थल सिद्ध हो रहा है।

इस क्षेत्र को विकसित करने व संवारने के लिए वन विभाग और विश्व प्रकृति निधि के संयुक्त तत्वाधान में मेरी गंगा मेरी डॉल्फिन परियोजना संचालित की जा रही हैं।

विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी डाॅ. अमान खान ने बताया कि हरिद्वार के भीमगोड़ा से बिजनौर बैराज के बीच डॉल्फिन की उपस्थिति घटी है, लेकिन बिजनौर से नरौरा बैराज के बीच डॉल्फिन की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। यह क्षेत्र पश्चिमी उत्तर प्रदेश में डॉल्फिन के लिए सबसे सुरक्षित स्थान है और गंगा तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इंसान की तरह फेफड़ों से सांस लेती है डॉल्फिन

डॉल्फिन कोई साधारण मछली नहीं, बल्कि एक स्तनधारी जीव हैॉ जो इंसान की तरह फेफड़ों से सांस लेती है। यह जीव दो से तीन वर्षों के अंतराल में केवल एक बच्चे को जन्म देती है, जो जन्म के समय लगभग 70 सेंटीमीटर लंबा और साढ़े सात किलोग्राम वजनी होता है।

मादा डॉल्फिन अपने बच्चे का पूर्ण मातृत्व से पालन-पोषण करती है और उसे दूध पिलाती है। पूर्व में किए गए सर्वेक्षणों के आंकड़े इस बात का प्रमाण है कि बिजनौर से नरौरा क्षेत्र में डॉल्फिन का परिवार लगातार बढ़ रहा है। हस्तिनापुर सेंचुरी में डॉल्फिन की बढ़ती यह संख्या न केवल गंगा स्वच्छता अभियान की सफलता को दर्शाती है, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए भी एक शुभ संकेत है।

वर्ष दर्ज डॉल्फिन संख्या
2015 22
2016 30
2017 32
2018 33
2019 35
2020 41

उत्तर प्रदेश की नदियों में है सर्वाधिक डॉल्फिन

वर्ष 2020 में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित प्रोजेक्ट डॉल्फिन के बाद देश की सभी नदियों में सर्वेक्षण कराया गया। वर्ष 2024 के सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट मार्च 2025 में प्रधानमंत्री ने जारी की, जिसमें आठ राज्यों की 28 नदियों में 8500 किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का 3150 दिनों तक गहन सर्वेक्षण कर कुल 6327 नदी डॉल्फिन दर्ज की गईं। जिसमें यूपी में सबसे अधिक 2,397 डॉल्फिन के साथ देश में पहले स्थान पर रहा। बिहार में 2220 डॉल्फिन, पश्चिम बंगाल में 815 और असम में 635 डॉल्फिन मिली थी।

सम्राट अशोक ने जारी किया था संरक्षण के लिए पहला आदेश

वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए पहला राज्यादेश ईसा पूर्व 232 में मगध के सम्राट अशोक ने अपने पंचम शिलालेख में पारित किया था। इस राज्यादेश में जिन प्राणियों के संरक्षण का उल्लेख था, उसमें गांगेय डॉल्फिन भी थी। संभवत दुनिया में वन्य और जलीय प्राणियों के संरक्षण के लिए पारित होने वाला यह पहला राज्यादेश था।  

इस शिलालेख में सम्राट अशोक ने कई तरह के पशु-पक्षियों और जलीय जीवों की हत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। इसमें स्पष्ट रूप से उन जीवों की सूची दी गई थी जिन्हें मारा नहीं जा सकता था। वन्यजीवों और जलीय जीवों के संरक्षण के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है।

डॉल्फिन के रोचक तथ्य

  • डॉल्फिन को सूंस के नाम से भी जाना जाता है।
  • डॉल्फिन अंधी होती है और यह अल्ट्रासोनिक तरंगों का प्रयोग करके दिशा निर्धारण करती है।
  • इंटरनेशनल यूनियन फार कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) ने डॉल्फिन को संकटग्रस्त प्रजातियों में रखा है।
  • डॉल्फिन केवल स्वच्छ पानी में ही रह सकती है।
  • यह फेफड़ों से सांस लेती है, इसलिए इसे सांस लेने के लिए हर 30-120 सेकंड में पानी की सतह पर आना पड़ता है।
  • भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम में डॉल्फिन को अनुसूची-1 में रखा गया है, जो इसे विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।
  • इसे गंगा का बाघ भी कहा जाता है क्योंकि यह नदी के पारिस्थितिक तंत्र में शीर्ष शिकारी है।
  • भारतीय पौराणिक कथाओं में डॉल्फिन को देवी गंगा का वाहन माना गया है।
  • डॉल्फिन के मस्तिष्क का एक हिस्सा सोते समय भी जागता रहता है, ताकि यह सांस लेने के लिए समय पर सतह पर आ सके और खतरों से बच सके।

वन क्षेत्राधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया कि वर्ष 2012 से यहां डॉल्फिन संरक्षण का कार्य चल रहा है। दो बार प्रांतीय सर्वे भी कराया जा चुका है। हस्तिनापुर क्षेत्र में डॉल्फिन की अच्छी संख्या होना गौरव की बात है।

प्रधानमंत्री के प्रोजेक्ट से डॉल्फिन के संरक्षण एवं संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। नदी में डॉल्फिन का मिलना स्वच्छ जल का भी संकेत होती हैं। गांगेय डॉल्फिन यानी सूंस जिन जगहों पर पाई जाती हैं माना जाता है कि वहां का जल काफी स्वच्छ होता है।

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