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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 07, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

मेरठ में बदल रहा खेती करने का तरीका, किसानों के लिए वरदान बना पालीहाउस, जानिए कम कृषि भूमि पर अधिक मुनाफे का 'किसानी फार्मूला'

By Taruna TayalEdited By:
Published: Mon, 07 Dec 2020 05:00 PM (IST)

मेरठ के किसानों के लिए पालीहाउस यानि संरक्षित खेती वरदान साबित हो रही है। मेरठ जिले में 46 हेक्टेयर के ...और पढ़ें

मेरठ में बदल रहा खेती करने का तरीका।
मेरठ में बदल रहा खेती करने का तरीका।

मेरठ, [व‍िनय विश्‍वकर्मा]। मेरठ के किसानों के लिए पालीहाउस यानि संरक्षित खेती वरदान साबित हो रही है। मेरठ जिले में 46 हेक्टेयर के क्षेत्रफल में पालीहाउस की शानदार खेती हो रही है। जिले के किसान पालीहाउस में सब्जी व फूलों की खेती कर रहे हैं। महंगी सब्जियां जैसे लाल पीली शिमला मिर्च, अंग्रेजी खीरा और महंगे फूलों में जरबेरा, गुलाब व लीलियम आदि की फसल किसानों की अर्थव्यवस्था को पंख लगा रही हैं। पालीहाउस की खेती से एक तरफ जहां इन किसानों ने गन्ने को दरकिनार कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ अन्य नकदी उपार्जित फसलों की खेती कर अच्छी आमदनी कर रहे हैं। मेरठ मंडल के छह जनपदों में सर्वाधिक पालीहाउस की खेती मेरठ जिले में हो रही है। पालीहाउस में कृत्रिम वातावरण तैयार कर पौधे को आर्द्रता, तापमान व सिंचाई को आवश्यकतानुसार व्यवस्थित तरीके से प्रबंधन किया जाता है। इसमें सरकार से 50 फीसद अनुदान की व्यवस्था रहती है।

गुलाब, खीरा व शिमला मिर्च मेरठ की पहचान

जिला उद्यान अधिकारी आरएस राठौर ने बताया कि मेरठ में किसान पालीहाउस की सहायता से गुलाब, खीरा, लाल पील शिमला मिर्च की शानदार खेती कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि पालीहाउस के लिए केवल एक एकड़ यानि छह बीघा जमीन में इन फसलों के उत्पादन से अच्छा मुनाफा निकलकर आता है। उन्होंने बताया कि मेरठ जिले में गुलाब, खीरा व लाल पीली शिमला मिर्च के अलावा जरेबरा व टमाटर पालीहाउस में शानदार फसल देता है।

दिल्ली भेजा जाता है फसलों का उत्पादन

पालीहाउस में गुलाब की खेती करने वाले सलावा निवासी किसान सुभाष गौड़, कुनकुरा में जरबेरा की खेती करने वाले प्रद्युम्न चौधरी व खेड़ी मनिहार में लाल पीली शिमला मिर्च की खेत करने वाले ब्रजमोहन राणा संरक्षित खेती के लिए जाने जाते हैं। इन सभी के पालीहाउस में तैयार की गई फसल दिल्ली की मंडियों में भेजी जाती है। जिससे अच्छा दाम मिलता है।

पालीहाउस के फायदे -

- फसल को कीट या बीमारी नहीं लगती है। जिससे अधिक और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन होता है।

- कृत्रिम वातावरण तैयार कर आर्द्रता, तापमान को फसल के अनुरूप बनाकर रखा जाता है।

- कम कृषि भूमि में अधिक से अधिक उत्पादन लेकर शानदार मुनाफा लिया जा सकता है।

- सरकार से 50 फीसद अनुदान के साथ किसानों को लाभ प्राप्त होने की योजना।

इनका कहना है -

पालीहाउस से छोटी सी जगह में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। इसमें 50 फीसद अनुदान सरकार से मिलता है। बिना बीज वाला खीरा, लाल पीली शिमला मिर्च, टमाटर, जरबेरा व गुलाब आदि इसमें मुख्य फसलों के रूप में लगाई जाती हैं। मेरठ मंडल में सर्वाधिक मेरठ जिले में 46 हेक्टेयर में पालीहाउस की खेती हो रही है। इच्छुक किसान पालीहाउस लगाने के लिए उद्यान विभाग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

- पंकज कुमार, उप निदेशक, उद्यान विभाग, मेरठ मंडल