मेरठ, जेएनएन। बच्चे की गले में सिक्का अटक जाने स्वजन आपा खो बैठे थे। मेडिकल इंमरजेंसी में तत्काल उपचार नहीं होने पर हंगामा कर दिया। उसके बाद मौके पर मौजूद स्टाफ से अभद्रता करते हुए सामान इधर से उधर फेंक दिया। कंट्रोल रूम को सूचना देने के बाद समय पर पुलिस नहीं पहुंची। उसके बाद बाइक पर सवार होकर डाक्टर थाने पहुंचे। तब इंमरजेंसी में पुलिस भेजकर मामले को शांत किया गया।

यह था पूरा मामला

सोमवार की दोपहर करीब दो बजे मेडिकल कालेज की इंमरजेंसी में कुछ लोग बच्चे को गोद में लेकर पहुंचे। बच्चे के गले में एक रुपये का सिक्का अटका हुआ था। उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। परिवार के लोगों ने मोहल्ले के डाक्टर को दिखाकर भी सिक्का निकलवाने का प्रयास किया है। वहां सही उपचार नहीं मिलने पर मेडिकल की इंमरजेंसी में ले गए। आरोप है कि वहां पर डाक्टर मौजूद नहीं थे। स्टाफ को बच्चे के गले में सिक्का निकालने की बात कही। स्टाफ भी डाक्टर के आने का इंतजार करने लगा। बच्चे के साथ परिवार और रिश्तेदार काफी लोग आए हुए थे। उपचार में देरी की वजह से बच्चे के स्वजन आपा खो बैठे। उन्होंने इंमरजेंसी में मौजूद स्टाफ से अभद्रता करते हुए मारपीट शुरू कर दी। उसके बाद यूपी-100 पर काल की गई। पुलिस बल मौके पर नहीं पहुंच पाया। तब डाक्टर प्रवीण त्यागी अपने साथ कुछ डाक्टरों को साथ लेकर मेडिकल थाने पहुंचे। इंस्पेक्टर प्रमोद गौतम को मामले की सूचना दी गई। इंस्पेक्टर ने चौकी इंचार्ज को काल की, जो उस समय कोर्ट में गए हुए थे। इधर-उधर से पुलिस बुलाकर इंमरजेंसी में पहुंचने के आदेश दिए है।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज ली

पुलिस के इंमरजेंसी में पहुंचने से पहले ही तीमारदार बच्चे को लेकर किसी निजी अस्पताल में ले गए थे। पुलिस ने तीमारदारों के अभद्रता करने की फुटेज भी मेडिकल कालेज से कब्जे में ले ली। मेडिकल के डाक्टरों और पुलिस को भी नहीं पता कि बच्चे को लेकर तीमारदार कहां से आए थे। इंस्पेक्टर प्रमोद गौतम का कहना है कि पुलिस के पहुंचने पर मामला शांत हो गया था। किसी भी तरफ से मामले की तहरीर नहीं दी गई है। उसके बाद सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस जांच कर रही है। 

 

Edited By: Taruna Tayal