मेरठ, जेएनएन। जांच रिपोर्ट में डेंगू की पुष्टि होने के बाद मरीज के क्षेत्र में लार्वा सर्वे के लिए मलेरिया विभाग की टीम तीन से चार दिन बाद पहुंच रही है। इससे डेंगू पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं हो पा रहा है। जानकारी के मुताबिक मवाना के ढिकौली में एक मरीज की डेंगू पॉजिटिव होने की रिपोर्ट 11 अक्टूबर को सामने आई थी। इसी दिन तीन स्थानों पर और मरीज मिले थे। पहले सीएमओ कार्यालय स्थित संक्रामक रोग सेल से एक दिन देरी से रिपोर्ट मलेरिया विभाग को मिली। फिर मलेरिया विभाग को ढिकौली तक पहुंचने में तीन दिन लग गए।

खड़े हुए कई सवाल

14 अक्टूबर को जिला मलेरिया अधिकारी के नेतृत्व में यहां टीम पहुंची और लार्वा सर्वे किया। सर्वे के दौरान मरीज के घर में मटके में डेंगू का लार्वा पाया गया। गनीमत रही कि इस घर के किसी और सदस्य को डेंगू के मच्छर ने डंक नहीं मारा। मलेरिया विभाग की टीम ने फॉगिंग कराने के साथ दवा का छिड़काव कराने की प्रक्रिया पूरी की। लेकिन तीन दिन देरी से पहुंची टीम कई सवाल छोड़ गई।

उसी दिन पहुंचने के हैं निर्देश

दरअसल, शासन का निर्देश है कि डेंगू का केस सामने आने के बाद संबंधित मरीज के क्षेत्र में उसी दिन टीम को पहुंचकर लार्वा सर्वे कर डेंगू की रोकथाम करनी है। मालूम हो कि जिले में अभी तक डेंगू के 65 मरीज सामने आ चुके हैं।

एक वाहन के भरोसे है विभाग

मलेरिया विभाग में जिला मलेरिया अधिकारी समेत एक एएमओ, पांच मलेरिया निरीक्षक, सात फील्ड वर्कर, एक डीएचडब्ल्यू, एक मैकेनिक तैनात हैं। लेकिन विभाग के पास सुदूर गांव में जाकर लार्वा सर्वे के लिए केवल एक वाहन है। जिले में एक ही दिन में अगर अलग- अलग स्थानों पर पांच मरीज डेंगू पीड़ित सामने आ जाएं तो मलेरिया विभाग वाहन की कमी के चलते असहाय हो जाता है।

265 लोगों को दिया नोटिस

डेंगू का लार्वा जिलेभर में हुए सर्वे के दौरान अभी तक 265 स्थानों पर मिला है। इन सभी लोगोंे को जिला मलेरिया विभाग की ओर से नोटिस दिया गया है। नोटिस के जरिए लोगों को घर में दोबारा डेंगू का लार्वा मिलने पर धारा 188 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी जाती है। एफआइआर तक कराने का प्रावधान है। यह बात दीगर है कि जिले में एफआइआर की कार्रवाई नहीं होती है। 

Posted By: Prem Bhatt

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