मेरठ, जेएनएन : नई शिक्षा नीति को लेकर पिछले कुछ दिनों से शिक्षा जगत में खूब चर्चा हुई। दक्षिण भारत में भाषा का विरोध होने के अलावा अधिकतर लोगों ने शिक्षा नीति में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की सराहना की। इसके बाद भी मंत्रालय की ओर से सुझाव मांगे जाने पर स्कूल, कालेजों व शिक्षा जगत से जुड़े लोगों की ओर से सुझाव भी केंद्र सरकार तक पहुंचाए गए हैं। इसके साथ ही स्कूलों प्रबंधकों के फेडरेशन की ओर से भी केंद्र सरकार को नई शिक्षा नीति में निहित अच्छे बिंदुओं के साथ ही सुझाव के बिंदु भी मुहैया कराए हैं। नई शिक्षा नीति से मेरठ के शिक्षा जगत के साथ ही युवा भी जुड़े हुए हैं। उनका मानना है कि शिक्षा अब गुणवत्तापरक होनी चाहिए जिससे युवाओं को शिक्षा के बाद बेरोजगाराी से जूझना न पड़े। इंडस्ट्री बेस्ड एजुकेशन को शिक्षा नीति में भी बढ़ावा देने को प्रमुखता दी गई है। अब बजट में इसे लागू करने की घोषण होने पर जल्द ही शिक्षा में बदलाव का दौर शुरू होने की उम्मी जताई जा रही है।

टीचर इंपावरमेंट है बड़ी चुनौती

शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए सबसे पहले शिक्षकों के पढ़ाई के तरीके में सुधार की जरूरत है। शिक्षकों को समय-समय पर ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। सीबीएसई और आइसीएसई ट्रेनिंग करा भी रही हैं लेकिन यूपी बोर्ड और सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ट्रेनिंग बेहद जरूरी है। जब तक शिक्षा के बजट में इस ओर विशेष प्रावधान नहीं रखा जाएगा तब तक इस ओर सुधार की संभावना कम दिख रही है। इनका कहना--

जितनी उम्मीदों के साथ देश के युवाओं व छात्रों ने सरकार को वोट दिया उसे देखते हुए बजट में शिक्षा के लिए कुछ नहीं दिया गया है। बजट से युवा वर्ग व छात्रों में मायूसी है।

-सम्राट मलिक शिक्षा के साथ ही स्कूलों में खेल को भी बढ़ावा मिलना चाहिए। खेल को शिक्षा का हिस्सा बनाए जाने से स्कूली बच्चों व कालेजों के छात्रों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

-कुशल कुमार नई शिक्षा नीति तो ठीक है लेकिन धरातल पर बदलराव की जरूरत है। सिर्फ कोर्स व पैटर्न बदलने से बात नहीं बनेगी। शिक्षक व छात्रों को इस बदलाव के लिए तैयार करना होगा।

-नैंसी शर्मा बेसिक शिक्षा के स्तर में सुधार की सबसे ज्यादा जरूरत है। सुधार नीचे से होगा तभी उच्च शिक्षा तक इस बदलाव का असर दिखाई देगा।

-नंदिनी भारद्वाज

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