मेरठ, [विवेक राव]। उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी युवाओं को रोजगार के लाले हैं। ऐसे दौर में भी दिन-रात एक कर कुछ युवा रोजगार की राह पकड़ रहे हैं, लेकिन उनके रास्ते में भी कांटे ही कांटे हैं। ऐसे ही शोषण के शिकार डा. प्रदीप कुमार अब अन्य युवा शिक्षकों की आवाज बन रहे हैं। वह डिग्री कॉलेजों में आयोग से चयनित होने के बाद भी नियुक्ति नहीं पाने वाले शिक्षकों की इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे हैं।

शहर के जनकपुरी में रह रहे डा. प्रदीप कुमार एक साल पहले तक सर्वहितकारी इंटर कॉलेज किनानगर मेरठ में रसायन विज्ञान के शिक्षक थे। उच्च शिक्षा चयन आयोग की परीक्षा पास कर डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बन गए। बरेली में नियुक्ति के बाद वेतन नहीं मिला। मुरादाबाद के एक कॉलेज प्रबंधन ने आयोग के चयन को चुनौती देते हुए दोबारा से प्रदीप की परीक्षा ली, लेकिन नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया। पिछले एक साल से बगैर वेतन के छात्रों को पढ़ा रहे प्रदीप ने हार नहीं मानी। प्रदीप अब उन अभ्यर्थियों की भी आवाज उठा रहे हैं जो उच्च शिक्षा में आयोग से चयनित होने के बाद अलग-अलग तरीके से प्रबंधन स्तर पर भेदभाव और शोषण के शिकार हैं। वह ऐसे लोगों को अपनी आवाज उठाने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रदीप की कोशिश से शिक्षकों की आवाज उच्च शिक्षा निदेशालय से लेकर शासन तक पहुंची है। उच्च शिक्षा निदेशालय भी सोचने को विवश हुआ है।

ये लड़ाई शिक्षा और शिक्षकों के हक की

उच्च शिक्षा में आयोग से चयनित होने बाद जब अभ्यर्थी कॉलेज में ज्वाइन करने जाते हैं, तो कॉलेज स्तर पर नियुक्ति पत्र देने के नाम पर अभ्यर्थियों का शोषण होता है। लाखों रुपये की मांग की जाती है। नहीं देने पर कॉलेज प्रबंधतंत्र अभ्यर्थियों को ज्वाइन नहीं कराता है। अगर किसी कारण से दबाव के चलते नियुक्ति पत्र दे दिया तो वह बाद में उन्हें हटाने को लेकर कई तरह से साजिश करते हैं। उच्च शिक्षा विभाग ऐसे मामलों में जानकर भी अंजान बना रहता है। प्रदीप कुमार उच्च शिक्षा की नींव कमजोर करने वाले लोगों से लड़ रहे हैं। प्रदीप की कोशिश से अब क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी स्तर पर शोषण करने वाले प्रबंध तंत्रों पर निगरानी रखी जा रही है। 

Posted By: Taruna Tayal

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