1960 से पहले दीपावली पर दीयों व कंडीलों से सजने शुरू हुए थे मेरठ के बाजार, 1972 से शुरू हुई लाइटों की सजावट; BBC ने सराहा
मेरठ के बाजारों में दीपावली की सजावट का इतिहास 1960 से पहले दीयों और कंडीलों से शुरू हुआ था। 1972 ...और पढ़ें

1969 में आबू लेन में दीपावली मेले के उद्घाटन के दौरान का फाेटो और वर्तमान में सजा आबू लेन बाजार।
HighLights
1972 में सड़क के दोनों तरफ बल्लियों पर बल्ब लगाकर की गई थी सजावट।
आबू लेन में सजावट के दौरान मुख्य द्वार पर मोदी टायर का किया गया था प्रचार।
ओम बाजपेयी, मेरठ। धन, संपदा और समृद्धि की देवी महालक्ष्मी के स्वागत की परंपरा पुरातन काल से चली आ रही है। मेरठ शहर की बात करें तो आज शहर के लगभग हर बाजार दीपावली पर जगमग रहता है।
स्थानीय व्यापार संघों द्वारा अपने अपने बाजारों को भव्य रूप से सजाने की होड़ सी लगी रहती है। समय के साथ साज सज्जा का प्रारूप बदलता रहा है। आइए जानते हैं मेरठ शहर के पुराने और नए बाजारों में दीपावली पर बाजार सजाने की पंरपरा पर एक नजर।
शहर के सामाजिक सांस्कृतिक बदलावों पर पैनी नजर रखने वाले वरिष्ठ इतिहासकार व मेरठ कालेज के इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष डा. केडी शर्मा ने बताया कि 1960 तक बेगमपुल और आबू लेन अस्तित्व में नहीं थे। बेगम पुल में जीआइसी के अलावा शहर के संभ्रांत और धनाढ्य लोगों की बड़ी-बड़ी कोठियां हुआ करती थी। तब सजावट जिसे पुराना शहर कहते हैं वहां तक सीमित थी। तब सजावट दीयो, मोमबत्ती और कंडीलों से होती थी। 1960 से पूर्व बुढ़ाना गेट से सुभाष बाजार,सराफा होते हुए घंटाघर तक दीयों और कंडीलों से बाजार सजता था।
सजावट में मुख्यत: फूलों की लड़ियों का प्रयोग होता था। बुढ़ाना गेट से सुभाष बाजार, कोतवाली, गुदड़ी बाजार, बजाजा, सराफा, कबाड़ी बाजार, वैली बाजार, घंटाघर से खैरनगर होते हुए बुढ़ाना गेट घंटाघर तक बाजार सजता था। उस समय बिजली का प्रयोग कम होता था। 1960 के बाद पहले बेगमपुल के दोनो ओर स्थित कोठियाें में दुकानें बनीं, उसके बाद जब वहां जगह नहीं रही तो आबू लेन विकसित हुआ। 1980 तक दोनो बाजार अस्तित्व में आ चुके थे।
बुढ़ाना गेट आर्य समाज के प्रधान सुशील बंसल ने बताया कि बुढ़ाना गेट के आसपास कंडील बनाने वालों का जमावड़ा रहता था। कारीगर कंडीले बनाने में कई दीपावली के कई दिन पहले जुट जाते थी। सजावट के आकर्षण का केंद्र कंडीले होती थी।
1972 में बेगमपुल में हुई थी लाइटों की सजावट, सबसे पहले का दावा
पुराने शहर से निकल कर चौड़ी सड़कों के दोनों ओर जो बाजार सबसे पहले विकसित हुआ उसमें बेगमपुल का नाम लिया जा सकता है। सोतीगंज को जाने वाली रोड से लेकर बेगमपुल चौराहे तक 1960 में 20-22 दुकानें थी। इसके पीछे बच्चा पार्क तक या तो खेत थे या हवेलियां थी।
खूनी पुल के नाम से विख्यात इस जगह लोग रात में आने से डरते थे। ऐसा कहना है कि बाजार के सबसे पुराने दुकानदारों में से किशन मल्होत्रा का। उनकी उम्र 87 वर्ष की है बतातें हैं कि उनके पिताजी ने 1954 में दुकान खोली थी।
उन्होंने बताया कि बाजार के दुकानदार दीपावली पर मिलकर दीये सजाते थे। 1960 के बाद बाजार में कई दुकानें बनी। लखपत सिंह की मार्केट भी उनमें शामिल थी। 1969 में यहां पर व्यापार संघ का गठन हुआ था।
बेगमपुल बाजार के संरक्षक अनिल मित्तल ने बताया कि 1972 में सड़क के दोनों ओर बल्लियां लगा कर उन पर बल्ब लगा कर सजावट की गई। यह मेरठ में पहली बिजली से की गई सजावट थी। इसके बाद यह सिलसिला दूसरे बाजारों में शुरु हुआ। बाद में तिरंगे लाइट का चलन आरंभ हुआ, जो आज भी जारी है।
मोदी टायर ने आबू लेन के मुख्य द्वार पर किया था प्रचार
प्रसिद्ध उद्योगपति सेठ गूजर मल माेदी और उनके परिवार द्वारा शहर में होने वाले आयोजनों जैसे रामलीला दशहरा उत्सव में भाग लिया जाता था। अन्य उद्योगपति भी इन आयोजनों से जुड़ने में गौरव महसूस करते थे। बेगम पुल व्यापार संघ के संरक्षक अजय मित्तल ने बताया कि आज की तरह बाजार का मुख्य द्वार सजाने की परंपरा 1975 के बाद आरंभ हो गई थी।
बेगमपुल व्यापार संघ ने अपने मुख्य द्वार पर केवल अपने बाजार के प्रचार का नियम बनाया था। बताया कि जब आबू लेन में सजावट शुरु हुई थी मुख्य द्वार पर मोदी टायर का प्रचार किया गया था। बेगम पुल व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष पुनीत शर्मा ने बताया कि इस बार भी बाजार को सजाने की तैयारी है। धनतेरस और दीपावली के दिन रंगारंग कार्यक्रम भी किए जाएंगे। बेगमपुल में भले ही सजावट पहले आरंभ हुई हो। लेकिन लाइटों की बेहतरीन सजावट सबसे पहले आबू लेन में शुरु हुई। यहां पर सजने वाले मुख्यद्वार को शहर के बड़े उद्योगपतियों द्वारा प्रायोजित किया जाता था।
बीबीसी ने किया था आबू लेन की सजावट का उल्लेख
आबू लेन व्यापार संघ के संरक्षक सुरेश सज्जानहार ने बताया कि बीबीसी लंदन ने रेडियो से भी यहां की सजावट का उल्लेख प्रशंसा के साथ अपने कार्यक्रम में किया था। उस दौरान उद्घाटन करने गुजरमल मोदी और अन्य उद्योगपति आते थे। आज भी यहां की सजावट को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं। यहां की सजवाट की परंपरा का अनुसरण दूसरे बाजारों ने किया। इस बार भी यहां भी यहां पांच से आठ नवंबर तक चार दिन का दीपावली उत्सव होगा।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।