[दिलीप पटेल] मेरठ। किसानों की पराली से बढ़े वायु प्रदूषण पर कोहराम मच गया था। एनजीटी की सख्ती के बाद नगर निगम भी डिवाइडर पर लगे पौधों की धुलाई में जुट गया था लेकिन यह कवायद उस वक्त की मजबूरी थी। वायु प्रदूषण के स्तर में सुधार होते ही विभाग अपनी जिम्मेदारी भूल गए। शहर में वैसे ही डिवाइडर पर पौधे कम है लेकिन जहां हैं, कम से कम उनकी देखरेख तो होनी चाहिए। गढ़ रोड से गुजरिए ..डिवाइडर पर लगे कनेर के पौधे हरे नहीं काले नजर आते हैं। पत्तियों और टहनियों में धूल की परत जम गई है। नगर निगम के पास टैंकर की कमी नहीं है, पानी भी पर्याप्त है लेकिन पौधों की सेहत खराब है। ईज ऑफ लिविंग सर्वे चल रहा है। डिवाइडर पर पौधे लगे हैं या फिर गमले रखे हैं। गढ़ रोड यह मानक तो पूरा करती है लेकिन सफाई नहीं होती है।

सत्‍ता वाले ही बेगाने

कुछ दिन पहले की बात है। हापुड़ अड्डे से कुछ अतिक्रमण हटाया गया। भाजपाईयो को यह हजम नहीं हुआ सो जा पहुंचे नगर निगम। उम्मीद थी कि अफसर खातिरदारी करेंगे। सम्मान के साथ बात सुनेंगे लेकिन दांव उल्टा पड़ गया। तकरार तेज तर्रार महिला अफसर से हो गई। भाजपाइयों को अपनी बात रखने के लिए अफसर की गाड़ी घेरनी पड़ी। अफसर ने बात सुनी मगर यह भी चेतावनी दे दी कि काम तो नियमों से ही होगा। जो सही है, वही होगा। इस हंगामे के बाद से विपक्षी चुटकी ले रहे हैं। चर्चा छिड़ती है तो विपक्षी कह बैठते हैं कि जिनकी सत्ता है वही बेगाने हो गए हैं। अफसरो से सम्मान मांगते फिर रहे हैं। विपक्षियों की बात कुछ सही है। आखिर सत्ता की एक हनक तो होती ही है। खैर, नगर निगम में विपक्षियों की इस हंगामे के बाद से बांछे खिली हुई हैं।

प्‍लान ज्‍यादा काम कम

जब से राज्य स्मार्ट सिटी में मेरठ शामिल हुआ है, प्लान ज्यादा बन रहे हैं मगर धरातल पर काम नहीं हो रहा। सड़क, स्कूल, हॉस्पिटल, रोड, स्टेडियम सब कुछ कागज पर स्मार्ट हो चुका है। केवल नाले बच रहे थे, नगर निगम ने इसका भी प्लान तैयार कर लिया। तीन नालों के पानी को फाइटो रेमेडीएशन तकनीक से साफ किया जाएगा। नालो में कचरे गोबर की जगह हरियाली नजर आएगी। नाले में पानी अब झरने की तरह बहेगा। हालांकि होगा कब, ये अफसरों से न पूछिए। जवाब यही मिलेगा कि शासन को बजट के लिए प्रस्ताव भेज दिया है, मिलते ही काम करेंगे। जब सब कुछ बजट पर ही निर्भर है तो उतने ही प्लान बनाओ जो धरातल पर दिखे भी। गांवड़ी में एक प्लांट चालू कर दिया। इसके बाद से कागज पर ही प्लान दौड़ रहे हैं, इसीलिए तो कचरा समाप्त नहीं हो पा रहा।

कहीं मिठास कहीं खटास

संघे शक्ति अर्थात एकता में ही शक्ति है। यह बात नगर निगम के दो सहायक अभियंताओं को समझ में आ गई, लंबे समय से दोनों अलग-अलग राह चल रहे थे। इन अभियंताओं को एकजुट करने की जिम्मेदारी मुख्य अभियंता ने निभाई। यह विषय चर्चा में है। बात चली तो मुख्य अभियंता बोले, कार्यभार संभालने के बाद एक ही काम बेहतर कर पाया हूं। निर्माण अनुभाग की आपसी खींचतान समाप्त कर दी है। फिर मुस्कुराते हुए बोले, इस एकजुटता से डर भी लगता है लेकिन पिफलहाल माहौल खुशनुमा है। इससे काम को गति मिलेगी हालांकि स्वास्थ्य अनुभाग में खींचतान अभी भी चल रही है। सफाई निरीक्षकों का कुनबा एक तरफ है और नगर स्वास्थ्य अधिकारी एक तरफ। बात नगर आयुक्त तक पहुंची तो समझाने की कोशिशें जारी हैं पर बात वर्चस्व से जुड़ी है। इस खींचतान में शहर में कचरे की दुगर्ंध फैलने लगी है। 

Posted By: Prem Bhatt

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