सहारनपुर, जेएनएन। सरकार की रोक के बावजूद भी नगर क्षेत्र में फलों को पकाने के लिए कार्बाइड जैसे रासायनिक पदार्थ का उपयोग धड़ल्ले से किया जाता है। चिकित्सकों की मानें तो कार्बाइड से पके फल मानव शरीर पर दुष्प्रभाव डालते है। कम समय में मोटी कमाई करने के लालच में केमिकल से फल पका कर फल विक्रेता मानव शरीर से खिलवाड़ करने में लगे है। जानकारों की मानें तो कार्बाइड में बहुत गर्मी होती है। इसलिए इसे शरीर के लिए घातक तत्व माना जाता है। इसके चलते कई खतरनाक बीमारी भी पैदा होती है। हालांकि इसका उपयोग खाद्य-पदार्थों में गैर कानूनी है। लेकिन इसके इसके बावजूद नगर फल मंडी और बाजार में लगने वाली सब्जी मंडियों में इसका प्रयोग खुलेआम देखा जा सकता है।

12 घंटे में पक जाते है फल

व्यापारी बाहर से कच्चे फल मंगाते हें। उन फलों को दुकानों और गोदामों में कार्बाइड की पुडिय़ा बनाकर रख देते है जिससे फलों को पकाया जाता है। कार्बाइड से 12 से 24 घंटे में फल पक जाते है। जिन्हें व्यापारी बेच देते हैं। कार्बेट पदार्थ चूने की तरह होता है। जो हवा के संपर्क में आते ही तेज गर्मी पैदा करता है।

भूसे व पत्ते से पकाए फलों का नहीं दुष्प्रभाव

फल पकाने का परंपरागत तरीका भूसे और पत्ते के बीच पाल लगाने का है। इस विधि से फल धीरे-धीरे 48 घंटे में पकते है। लेकिन आज के समय में शायद ही कोई इस विधि का उपयोग करता हो। भूसे और पत्ते से पकाए गए फलों का शरीर पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है। इस तरीके से देरी लगने और पैसा ज्यादा खर्च होने के कारण इसका उपयोग फल-सब्जी विक्रेताओं ने बंद कर दिया है। फल विक्रेताओं ने इसके स्थान पर केमिकल के उपयोग का आसान तरीका तलाश लिया है।

त्वचा रोग को देता है जन्म

नगर के प्रसिद्ध चिकित्सक डा. शिवदर्शन पुंडीर के अनुसार कार्बाइड में काफी गर्मी होती है। इसके उपयोग से शरीर के अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है। पेट संबंधी समस्याएं किडनी, एलर्जी व त्वचा संबंधी रोग पैदा हो सकते हैं। कार्बाइड का इस्तेमाल कैंसर जैसे रोगों की बुनियाद भी बन जाता है। इसलिए इसके उपयोग से बचना चाहिए। कृषि विभाग के अधिकारियों का भी कहना है कि कार्बाइड से पके फलों के परिणाम घातक होते हैं।

ऐसे भी कर सकते हैं इस्‍तेमाल

केला, सेव, आम व अन्‍य मौसमी फलों को केमिकल से पकाया जाता है। इसके इस्‍तेमाल से पहले यह बेहत दी सतर्क रहना चाहिए। खाने से पहले इन फलों को अच्‍छी तरह से धो कर ही खाएं। साथ ही सेव जैसे फलों को भी छिलकर ही खाना चाहिए ताकि खतरा कम हो।  

Edited By: Himanshu Dwivedi

जागरण फॉलो करें और रहे हर खबर से अपडेट