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'बोलती सड़क' से लेकर अगरबत्ती सुखाने की मशीन तक: CCSU के छात्रों ने पेश किए बेमिसाल स्टार्टअप मॉडल

By Amit Tiwari Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 08 Oct 2026 03:04 PM (IST)

मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के छात्रों ने 'सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज-2026' में कई तकनीकी नवाचार प्रस्तुत किए। इनमें ...और पढ़ें

सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में सेवा फर्स्ट इनोवेशंस चैलेंज के अंतर्गत छात्रों ने प्रस्तुत किए मॉडल।

सर छोटूराम इंजीनियरिंग कॉलेज में सेवा फर्स्ट इनोवेशंस चैलेंज के अंतर्गत छात्रों ने प्रस्तुत किए मॉडल।

HighLights

  1. सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज में विद्यार्थियों ने पेश किए मॉडल और आइडिया।

  2. छात्रों ने कृषि, जल संरक्षण और करियर मार्गदर्शन पर समाधान प्रस्तुत किए।

जागरण संवाददाता, मेरठ। रोजमर्रा की समस्याओं को तकनीक के जरिए हल करने की कोशिश में युवाओं ने कई नए आइडिया सामने रखे। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के सर छोटूराम इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी के कमेटी रूम में गुरुवार को सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज-2026 के तहत विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट और माडल प्रस्तुत किए। इसमें 38 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया।

विद्यार्थियों ने शिक्षा, सड़क सुरक्षा, जल संरक्षण, कृषि, उद्योग और डिजिटल तकनीक से जुड़ी समस्याओं को अपने प्रोजेक्ट का आधार बनाया। प्रस्तुतियों में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला प्रोजेक्ट ‘बोलती सड़क’ रहा। इसमें सड़क पर गड्ढे, दरार और जलभराव जैसी समस्याओं की शिकायतों को एक जगह व्यवस्थित करने का विचार रखा गया।

विद्यार्थियों का कहना था कि अलग-अलग जगह शिकायतें होने से यह तय करना मुश्किल होता है कि किस समस्या पर पहले काम किया जाए। प्रोजेक्ट का मकसद शिकायतों को व्यवस्थित कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई में मदद करना है।

एक प्लेटफार्म पर इलेक्ट्राॅनिक्स की पूरी प्रयोगशाला

‘ऐसेन हाक’ टीम ने विद्यार्थियों के लिए पोर्टेबल इलेक्ट्राॅनिक्स लर्निंग प्लेटफार्म का माडल पेश किया। इसमें गेम आधारित लर्निंग के साथ वास्तविक सर्किट तैयार करने, कैमरे से सर्किट की जांच, कोडिंग, टेस्टिंग, सेंसर और पावर सप्लाई जैसी सुविधाएं एक ही डिवाइस में देने का प्रयास किया गया है। टीम का जोर इस बात पर रहा कि विद्यार्थी केवल किताबों से न सीखें, बल्कि खुद प्रयोग करके तकनीक को समझें।

कोड-एससीआरआइईटी ने विद्यार्थियों के लिए अपने स्तर पर विकसित फुल-स्टैक डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का माडल प्रस्तुत किया। टीम के मुताबिक इसका इस्तेमाल विश्वविद्यालय के कुछ वास्तविक आयोजनों में भी किया जा रहा है।

जल संरक्षण से करियर मार्गदर्शन तक

चैलेंज में वर्षा जल संचयन से जुड़े समाधान भी प्रस्तुत किए गए। रेन वाटर हार्वेस्टिंग एस्टीमेटर के जरिए जल संरक्षण की योजनाओं को बेहतर ढंग से तैयार करने का विचार सामने आया। विद्यार्थियों ने बताया कि तकनीक का सही इस्तेमाल कर वर्षा जल को बचाने की योजनाओं को ज्यादा व्यावहारिक बनाया जा सकता है।

ब्रेनबोट्स टीम ने विद्यार्थियों के लिए करियर गाइडेंस और मेंटरशिप से जुड़ा डिजिटल प्लेटफार्म प्रस्तुत किया। चैम्प इनोवेटिव ने स्मार्ट सेफ्टी से जुड़ा विचार रखा। कुछ टीमों ने ई-कामर्स और सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल समाधान भी पेश किए।

अगरबत्ती सुखाने की मशीन और उपग्रह चित्रों का विश्लेषण

कजट्रानिक्स लैब्स ने अगरबत्ती सुखाने की मशीन का माडल पेश किया। इसका उद्देश्य अगरबत्ती बनाने की प्रक्रिया में लगने वाले समय और मेहनत को कम करते हुए प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करना है।

सस्टेन एक्स टीम की GeoZenX.ai परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और रिमोट सेंसिंग को जोड़ा गया है। यह अलग-अलग समय के उपग्रह चित्रों में हुए बदलावों की पहचान कर उनका विश्लेषण करने की दिशा में काम करती है। इसके जरिए जमीन और आसपास के क्षेत्र में समय के साथ होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिल सकती है।

फसल रोग की शुरुआती पहचान पर भी काम

टीम हॉक ने कृषि क्षेत्र की समस्या को ध्यान में रखते हुए फसल में रोग और कीट प्रकोप की शुरुआती पहचान का समाधान प्रस्तुत किया। इसका उद्देश्य फसल में होने वाले नुकसान को समय रहते पहचानना और किसानों को जल्द कार्रवाई करने में मदद देना है।

टेकबाइट्स ने संभावित खतरनाक क्षेत्रों की पहचान के लिए ‘Intelligent Identification of Hazard-Based Red Zones’ का विचार रखा। इसके जरिए जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान कर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है।

एक अन्य टीम ने खदानों में कोहरे और कम दृश्यता के दौरान वाहनों की सुरक्षित आवाजाही के लिए ‘Adaptive Fog-Risk & Fleet Coordination System’ का माडल प्रस्तुत किया।

कक्षा की पढ़ाई से आगे वास्तविक समस्याओं पर फोकस

एसएफआईसी-2026 की प्रस्तुतियों में एक बात साफ नजर आई कि विद्यार्थियों ने केवल तकनीकी माडल बनाने पर ध्यान नहीं दिया, बल्कि यह भी बताया कि उनका समाधान किस वास्तविक समस्या के काम आ सकता है। सड़क के गड्ढों और जलभराव से लेकर फसल रोग, कोहरा, जल संरक्षण, करियर मार्गदर्शन और डिजिटल सुविधाओं तक कई विषयों को विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट में शामिल किया।

इन प्रोजेक्ट से यह भी सामने आया कि विद्यार्थियों को अगर समस्या पहचानने और उस पर काम करने का अवसर मिले तो वे अपने तकनीकी ज्ञान को समाज की जरूरतों से जोड़ सकते हैं। यही नवाचार को कक्षा और प्रयोगशाला से निकालकर वास्तविक जीवन तक पहुंचाने की दिशा है।