CCSU : कापियों की जांच में मिली बड़ी गड़बड़ी, दोबारा मूल्यांकन में 40 अंक तक बढ़े
सीसीएसयू बीकॉम द्वितीय सेमेस्टर के संशोधित परिणाम में बड़ा उलटफेर हुआ है, जहां पहले फेल हुए छात्र पुनर्मूल्यांकन के बाद ...और पढ़ें

(प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता, मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (सीसीएसयू) में परीक्षा कापियों के मूल्यांकन में लापरवाही का मामला बीकाम द्वितीय सेमेस्टर के संशोधित परिणाम के बाद गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
विश्वविद्यालय की ओर से जारी पहले परिणाम में बिजनेस मैनेजमेंट, फाइनेंशियल अकाउंटिंग और को-करिकुलर विषयों में हजारों विद्यार्थियों को फेल घोषित कर दिया गया था। कई विद्यार्थी को तीनों विषयों में अनुत्तीर्ण दिखाए गए थे। करीब एक महीने बाद दोबारा जारी परिणाम में तस्वीर पूरी तरह बदल गई। पुनर्मूल्यांकन के बाद विद्यार्थियों के अंकों में 20 से 40 अंक तक की बढ़ोतरी हुई और बड़ी संख्या में विद्यार्थी पास हो गए।
मामला सामने आने के बाद छात्र संघ के पूर्व महामंत्री अंकित अधाना ने परीक्षा नियंत्रक अजय कृष्ण यादव को ज्ञापन सौंपकर मूल्यांकन में गड़बड़ी की शिकायत की थी। उन्होंने विश्वविद्यालय से कापियों की दोबारा जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद विश्वविद्यालय ने परिणाम की समीक्षा कर दोबारा रिजल्ट जारी किया। संशोधित परिणाम में अंकों का अंतर इतना अधिक रहा कि पहले तीन विषयों में फेल दिखाए गए राजकीय महाविद्यालय हस्तिनापुर के विद्यार्थी भी पास हो गए।
किसी के 37 तो किसी के 40 अंक बढ़े
संशोधित परिणाम में विद्यार्थियों के अंकों में हुई बढ़ोतरी विश्वविद्यालय की मूल्यांकन प्रणाली की पोल खोल रहे हैं। आयुषी शर्मा के सी010201टी कोड में पहले 15 अंक थे, जो बढ़कर 31 हो गए। सी010202टी में 13 से बढ़कर 47 अंक हो गए, जबकि जेड020202 में 22 से बढ़कर 33 अंक हो गए। इसी तरह शौर्य बसोया के सी010201टी में 13 से बढ़कर 38, सी010202टी में 10 से बढ़कर 50 और जेड020202 में 35 से बढ़कर 46 अंक हो गए। ओजस के तीनों विषयों में क्रमशः 20 से 37, 13 से 39 और 37 से 49 अंक हुए।
पलक जैन के सी010201टी में 18 से बढ़कर 41, सी010202टी में 14 से बढ़कर 57 और जेड020202 में 45 से बढ़कर 60 अंक हो गए। दीपांशु के अंकों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। उनके तीन विषयों में पहले 14, 13 और 35 अंक थे, जो संशोधित परिणाम में बढ़कर क्रमशः 36, 39 और 46 हो गए। कृष्ण कुमार के सी010201टी में 19 से बढ़कर 35, सी010202टी में 19 से बढ़कर 56 और जेड020202 में 46 से बढ़कर 61 अंक हो गए।
राहत मिली, लेकिन परीक्षकों पर कार्रवाई की मांग
छात्रों का कहना है कि संशोधित परिणाम आने से उन्हें राहत जरूर मिली है, लेकिन पहले मूल्यांकन में इतनी बड़ी विसंगति कैसे रह गई, इसका जवाब विश्वविद्यालय प्रशासन को देना चाहिए। विद्यार्थियों को करीब एक महीने तक फेल होने की चिंता और मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा। छात्रों ने मांग की है कि जिन परीक्षकों की लापरवाही से विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ, उनकी जिम्मेदारी तय कर सख्त कार्रवाई की जाए। इस पूरे मामले ने विश्वविद्यालय की परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सवालों का जवाब विश्वविद्यालय की ओर से नहीं मिल रहे हैं, जबकि ऐसा पहले भी बार-बार हो चुका है।
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