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51 कॉल, 1000 रुपये का सांप, 12 गवाह और 540 दिन बाद अमित के कत्ल में पत्नी व उसका प्रेमी दोषी; पूरी इनसाइड स्टोरी

By Sushil Kumar Edited By: Praveen Vashishtha
Published: Thu, 08 Oct 2026 01:51 PM (IST)

Amit murder case: मेरठ में अमित हत्याकांड में 540 दिन की सुनवाई के बाद पत्नी रविता कश्यप और उसके प्रेमी ...और पढ़ें

अमरदीप व रविता को कोर्ट से बाहर लाते पुलिसकर्मी और अमित का फाइल फोटो।

अमरदीप व रविता को कोर्ट से बाहर लाते पुलिसकर्मी और अमित का फाइल फोटो।

HighLights

  1. अमित हत्याकांड में पत्नी रविता और प्रेमी अमरदीप दोषी करार।

  2. हत्या के बाद रविता-अमरदीप के बीच 51 बार हुई बातचीत।

  3. पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने गला घोंटकर हत्या की पुष्टि की।

जागरण संवाददाता, मेरठ। अदालत ने 540 दिनों की कार्रवाई के बाद रविता कश्यप और अमरदीप को दोषी ठहराया। मामले में 12 लोगों की गवाही और पुलिस विवेचक इंदू वर्मा की ओर से पेश साक्ष्यों को अहम माना गया। बचाव पक्ष की ओर से अमरदीप के मामा ने गवाही दी कि 12 अप्रैल 2025 की रात 10 बजे तक वह अपनी बुआ के घर पर था।

जवाब में अमित पक्ष ने दलील दी कि अमरदीप के वहां से अकबरपुर सादात पहुंचने में 35 मिनट लगते हैं। वहां से रात में लौटने के बाद अमरदीप रविता के घर गया, अमित की हत्या कर फिर बुआ के घर लौट आया। एडीजीसी फरजाना मकसूद के अनुसार, मोबाइल कंपनियों के अधिकारियों लोकेश कुमार और शुभम शर्मा ने अदालत में काल डिटेल की पुष्टि की।

हत्या वाली रात से अगले दिन तक रविता और अमरदीप के बीच 51 बार बातचीत हुई। अभियोजन के मुताबिक, हत्या के बाद अमरदीप बुआ के घर चला गया था और वहीं से बार-बार रविता को फोन कर घटनाक्रम की जानकारी ले रहा था। रविता ने अदालत में दावा किया कि जिस नंबर पर अमरदीप से बातचीत हुई, वह अमित इस्तेमाल कर रहा था और उसने खुद अमरदीप को कोई काल नहीं की।

इस दावे पर विवेचक इंदू वर्मा ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, अमित की मौत 12 अप्रैल की रात को ही हो चुकी थी। ऐसे में 13 अप्रैल को अमित के मोबाइल से बातचीत होने का दावा सवालों के घेरे में आ गया। अभियोजन ने अमित की मां मुनेश और भाई मोनू को भी अहम गवाह बनाया। मुनेश ने अमरदीप को 12 अप्रैल की रात घर से निकलते देखने की बात कही।

उसने यह भी बताया कि रविता और अमरदीप को पहले आपत्तिजनक स्थिति में देखा था, लेकिन परिवार की इज्जत के कारण मामला दबा दिया था। अदालत में कृष्ण और सपेरे प्रीतम नाथ की गवाही भी हुई। कृष्ण ने बताया कि उसने अमरदीप को करीब एक हजार रुपये में सांप उपलब्ध कराया था। उसे बताया गया था कि सांप माता के जागरण में पूजा के लिए चाहिए और जहरीला नहीं होना चाहिए।

कृष्ण ने यह सांप सपेरे प्रीतम नाथ से लिया था। प्रीतम नाथ ने अदालत में बयान दिया कि उसने कृष्ण को बूढ़ा घोड़ा पछाड़ सांप दिया था। घटना के बाद सुखपाल और पिंटू ने सांप को पकड़कर बोरे में बंद किया था। उन्होंने अदालत में बताया था कि सांप अमित की चारपाई पर था, लेकिन पोस्टमार्टम में शरीर पर सर्पदंश का कोई निशान नहीं मिला। गवाही, काल डिटेल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों से हत्या की कड़ियां जुड़ती चली गईं।

गला दबाने से टूटीं गले की हड्डियां

अधिवक्ता बलराज सिंह के अनुसार, डा. कपिल गर्ग ने अदालत में बताया कि अमित की मौत सांप के डसने से नहीं, बल्कि गला और नाक-मुंह दबाने के कारण दम घुटने से हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले की महत्वपूर्ण हड्डियों के टूटने और शरीर पर संघर्ष के निशान मिले थे। चिकित्सक के अनुसार, हड्डियों का इस तरह टूटना जबरदस्ती गला घोंटने की ओर स्पष्ट संकेत करता है।

अमित के शव का पोस्टमार्टम 13 अप्रैल 2025 को शाम 5:45 बजे शुरू होकर 6:30 बजे तक चला। चेहरे पर आक्सीजन की कमी के कारण हल्का नीलापन था। दोनों आंखें बंद और कंजस्टेड थीं, जबकि हाथों के नाखून भी नीले पड़े थे। चेहरे और नाक के बाईं ओर खरोंच व रगड़ और निचले होंठ व दोनों एड़ियों पर भी चोट के निशान थे। गर्दन पर चोट मिली। त्वचा खोलने पर खून के थक्के पाए गए। पोस्टमार्टम में थायराइड कार्टिलेज के दोनों सुपीरियर कार्न और हायोइड कार्न टूटे मिले।