मेरठ, जेएनएन। श्रीराम ग्रुप चीनी उद्योग से हाथ खींच रहा है। इसके स्वामित्व वाली मवाना व नंगलामल चीनी मिल की बिक्री की सुगबुगाहट एक बार फिर तेज हो गई। सोमवार को अदाणी समूह के प्रतिनिधियों ने दोनों चीनी मिलों का दौरा कर संपत्ति का आकलन किया। माना जा रहा ग्रुप की एक टीम जल्द दौरा करेगी और उसके बाद सौदे पर मुहर लग सकती है। हालांकि मिल प्रबंधन इससे इन्कार कर रहा है।

श्रीराम ग्रुप ने मवाना चीनी मिल की नींव 1950 में रखी थी। वर्तमान में चीनी उद्योग में यह मिल शिखर पर है और 55 हजार से अधिक किसान जुड़े हैं। चीनी मिल की संपत्ति की पूर्व में कई बार बिक्री की सुगबुगाहट के साथ मार्केट वेल्यू लग चुकी है, लेकिन चीनी मिल का क्षेत्रफल और संपति ज्यादा होने के चलते सौदा अधर में ही रहा। सप्ताह भर से वालमार्ट और अदाणी ग्रुप से सौदे की बात चलने की सुगबुगाहट थी। सोमवार को अदाणी ग्रुप के अधिकारियों का दल पहले नंगलामल चीनी मिल गया। जहां केन यार्ड, चीनी गोदाम के साथ डिस्टलरी पहुंचकर संपति देखी। उसके बाद अधिकारी मवाना चीनी मिल पहुंचे और देर शाम तक मिल व गेस्ट हाउस में रहे। उसके बाद लौट गए। माना जा रहा जल्द ही ग्रुप का दूसरा दल आएगा और डील पर मुहर लग सकती है। इस दौरान चीनी मिल ग्रुप के एमडी आरके गंगवार व अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

डालमिया व आइपीएल ग्रुप

भी पूर्व में कतार में रहा

चीनी उद्योग में डालमिया व आइपीएल ग्रुप का बड़ा नाम है। वर्ष-2018, 19 में दोनों ग्रुप ही मवाना चीनी मिल खरीदने को काई बार दौरा कर चुके थे लेकिन सौदा नहीं हुआ।

इन्होंने कहा..

गुरुग्राम हेडक्वार्टर से अधिकारी रुटीन के अनुसार चीनी मिल आए थे लेकिन बिक्री जैसी कोई बात अभी नहीं है। मेरे पास पूरे दिन में ऐसी कई फोन काल आई हैं।

-प्रमोद बालियान, वरिष्ठ महाप्रबंधक गन्ना एवं प्रशासन, मवाना चीनी मिल

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