मेरठ, जेएनएन। सेना की खुफिया एजेंसी की ओर से सिविलियन लोगों के फर्जी पेंशन कागजात बनाने के गिरोह को पकड़ने के मामले में तीन ट्रेवल एजेंसियों के नाम सामने आए हैं। सेना के खुफिया एजेंसी के साथ ही एसटीएफ की ओर से भी इन तीन एजेंसियों के बारे में छानबीन की जा रही है। इनके बारे में यह पता चला है कि यह एजेंसिया ऐसे लोगों को ही खोजती थी जो बाहर जाकर नौकरी करना चाहते हैं। विशेष तौर पर उन्हें पूर्व सैनिक चाहिए होते थे। इनमें भी थोड़ी तफ्तीश के बाद यह बात सामने आई है कि यह तीनों एजेंसी गोरखा या नेपाली मूल के लोगों को ही बाहर खाड़ी देशों में भेज रही थी। इसी कड़ी में इस गिरोह का लिंक नेपाल से भी जुड़ा है। नेपाल में इनके कुछ साथी हैं जो वहा के नागरिकों को इनके पास भेजते थे और सेना के फर्जी पेंशन कागजों पर इन्हें नौकरी के लिए बाहर भेजा जाता था।

इन एजेंसियों और फर्जी कागजात बनाने वाले गिरोह ने सबसे ज्यादा नेपाली मूल के लोगों व पहाड़ी लोगों में गोरखा को अपना निशाना बनाया है। इस मामले में खाड़ी देशों से जुड़ाव और आईएसआई से लिंक की आशका को देखते हुए गोरखा व नेपाली मूल के लोगों से कनेक्शन की जाच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि विशेष तौर पर नेपाली मूल के लोगों या गोरखा को ही क्यों बाहर भेजा जा रहा था। भारतीय सीमा हिमालयन क्षेत्र में चीन और पाकिस्तान दोनों से जुड़ी है। पहाड़ी क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही के लिए गोरखा ही सबसे ज्यादा मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। ऐसे में इस बात की भी आशका जताई जा रही है कि इन्हें फर्जी कागजातों पर पूर्व सैनिक के तौर पर सीमा के दूसरी तरफ से जासूसी के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही पूर्व सैनिक होने के कारण उस क्षेत्र में में प्राथमिक तौर पर कागजात देखने पर कोई संदेह भी नहीं करेगा। इन तमाम पहलुओं पर इस मामले की जाच एजेंसिया अपने अपने सूत्रों के आधार पर जाच कर रही हैं।

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